लाखों मुसलमानों के बीच एकेला हिंदू फ्लैट

अहमदाबाद एक ऐसा शहर है जहां हिंदू-मुस्लिम दंगों के बाद दोनों फिर्को के लोग अलग-अलग बस्तियों में रहने लगे थे। लेकिन इन सबसे अलग है ‘जलक अपार्टमेंट्स’, जहां सिर्फ अमन और भाईचारा ही बसता है।

इस कॉम्प्लेक्स में 50 फ्लैट्स हैं। जहुपूरा की मुस्लिम बस्ती में यह अकेला हिंदू अपार्टमेंट है। जहूपुरा एशिया की सबसे बड़ी मुस्लिम बस्तियों में से एक है। यहां तकरीबन 4.5 लाख मुस्लिम रहते हैं। इन फ्लैट्स में तकरीबन 35 खानदान रहते हैं। यह फ्लैट वेजलपुर (हिंदू अक्सरियत वाला इलाका) की सरहद पर है। जलक अपार्टमेंट्स के बाहर एक आवामी नलका है जहां से हिंदू और मुसलमान दोनों पानी भरते हैं।

1992 में बाबरी मस्जिद के शहीद किये जाने के बाद हुए दंगे जलक के घरों में तोड़फोड़ हुई थी। भीड़ ने जलक अपार्टमेंट्स पर हमला कर दिया था और लूटपाट मचाई थी। यहां तक कि गैस सिलिंडर और बर्तन तक लूट लिए थे। जलक में हुए तशद्दुद का यह एक अकेला मामला है। इसके बाद से यहां हमेशा ही अमन का माहौल रहा है। साल 2002 में गोधरा दंगों के दौरान भी यहां किसी भी तरह का तशद्दुद नहीं हुआ।

विमला यादव (53 साल) कहती हैं कि,’यहां हम और हमारे पड़ोसी चैन की जिंदगी जीते हैं। हालांकि कभी-कभी छोटे-मोटे मसलों को लेकर झगड़ा हो जाया करता है।’ वह उत्तर प्रदेश की हैं और शादी के बाद गुजरात आई थीं। विमला याद करती हैं कि किस तरह बाबरी मामले में पैदा हुए तशद्दुद के बाद उन्हें अपने खानदान के साथ घर छोड़कर जाना पड़ा था।

लेकिन वे वापस आए हैं क्योंकि वही उनका एक घर था। गोधरा दंगों के बाद भी उन्होंने कुछ दिनों के लिए घर छोड़ा लेकिन सिर्फ अपने रिश्तेदारों के कहने पर।

राजस्थान के गजेंद्र पटेल ने दो साल पहले जलट अपार्टमेंट्स में फ्लैट किराए पर लिया था। पटेल ड्राइवर का काम करते हैं। वह कहते हैं,’हिंदू का यहां रहने में क्या बड़ी बात है? हमारे मुस्लिम दोस्त भी बहुत मददगार हैं।’ असलम कुरैशी एक कपड़ा के ताज़िर हैं। वह जलक के पास की एक बिल्डिंग में रहते हैं। असलम ने बताया कि अगर शहर में कोई फिर्कावाराना तनाव होता है तब भी जलक पर इसका कोई असर नहीं पड़ता ।