30 साल फौज में रहे सनाउल्लाह को विदेशी घोषित किया जा सके इसलिए पुलिस ने रचा साजिश : गवाह

रिटायर्ड सैन्यकर्मी मोहम्मद सनाउल्लाह को पिछले महीने ’अवैध नागरिक’ घोषित किए जाने और गिरफ्तार करने का मामला गरमाया हुआ है। इस मामले में असम पुलिस के बॉर्डर ब्रांच के एक पूर्व सब इंस्पेक्टर के खिलाफ सोमवार को एफआईआर दर्ज की गई। पूर्व सब इंस्पेक्टर पर आरोप है कि उन्होंने सनाउल्लाह के खिलाफ झूठी रिपोर्ट तैयार की, जिसके कारण से उन्हें इन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। बता दें कि असम पुलिस का बॉर्डर ब्रांच एक विशेष विंग है, जो राज्य में अवैध तरीके से रह रहे विदेशियों की पहचान के मामलों को देखता है।

तत्कालीन एसआई चंदरामल दास की 2009 की रिपोर्ट में जिन 3 गवाहों का जिक्र है, उन्होंने रविवार को आरोप लगाया कि दास ने उनके बयानों से छेड़छाड़ की और जाली दस्तखत भी बनाए रखा। ऐसा इसलिए ताकि इसलिए सनाउल्लाह ’को विदेशी घोषित किया जा सके। कामरूप के अडिशनल एसपी संजीब सैकिया ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, कर्ता जांचकर्ता (दास) की रिपोर्ट में जिन तीन गवाहों का जिक्र है, उनकी शिकायत के आधार पर बोको पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। शिकायत की गई है कि दास ने इनकी गन्धर्वता ली और उनके जाली दस्तख़त भी तैयार किए। ‘

52 साल के सनाउल्लाह सेना से सूबेदार पद से 2017 में रिटायर हुए थे। उन्होंने आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर और उत्तर पूर्व में भी अपनी सेवाएं दी थीं। उन्होंने 21 मई 1987 को सेना जॉइन की थी। 2014 में उन्हें प्रेसिडेंट सर्टिफिकेट भी मिला था। रिटायरमेंट के बाद वह बतौर सब इंस्पेक्टर असम पुलिस के बॉर्डर विंग में शामिल हुए थे। संबंधित परीक्षाओं में पास होने के बाद उन्हें कामरूप (ग्रामीण) जिले में तैनाती मिली थी। 2008-09 में बॉर्डर पुलिस ने उनके अवैध नागरिक होने के शक में उनकी जांच की और फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में उनके खिलाफ एक केस रेफरेंस केस ’डाला। ट्रिब्यूनल में यह ‘रेफरेंस’ का आधार दास की जांच रिपोर्ट थी।

एसआई दास की 2009 की रिपोर्ट में कलाहिकाश गांव के रहने वाले अमजद अली, मोहममद कुरान अली और मोहम्मद सुब्हान अली को गवाह संख्या 1, 2 और 3 के तौर पर शामिल किया गया था। बयानों में तीनों ने माना था कि वे स्थानीय नागरिक हैं जबकि सनाउल्लाह नहीं हैं। बयानों के मुताबिक, तीनों ने माना कि उन्हें सनाउल्लाह की नागरिकता के बारे में पता नहीं है। सनाउल्लाह को इस मामले में पिछले साल पेश होने का आदेश मिला था। हालांकि, इस साल 23 मई को उसे केस हार गए और इसके पांच दिन बाद असम के गोलपाड़ा जिले में उन्हें अवैध प्रवासियों के लिए बने डिटेंशन सेंटर में ले जाया गया।

साभार : जनसत्ता