370 को हटाना ही होगा, मुसलमानों को तोहफे में नहीं दिया जाएगा कश्मीर : शिवसेना

370 को हटाना ही होगा, मुसलमानों को तोहफे में नहीं दिया जाएगा कश्मीर : शिवसेना

नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में गृह मंत्री बनाए गए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पद संभाले के बाद जम्मू कश्मीर को लेकर बैठकें कर रहे हैं। हाल ही में गृह मंत्रालय ने जम्मू कश्मीर के परिसीमन की घोषणा की थी। अब एनडीए की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने इस कदम का स्वागत किया है।

शिवसेना ने गुरुवार को कहा है कि कश्मीर मुसलमानों को तोहफे में नहीं दिया जाएगा. पार्टी ने यह बात आर्टिकल 370 का मुद्दा उठाते हुए अपने मुखपत्र सामना में लिखी है. पार्टी ने लिखा है, ”घाटी में मुसलमानों की जनसंख्या 68.35 फीसदी है, जबकि हिंदुओं का प्रतिशत राज्य की कुल जनसंख्या का 28.45 फीसदी है. इसका मतलब यह नहीं है कि कश्मीर मुसलमानों को तोहफे में दे दिया जाएगा. वे भी भारतीय हैं और देश के कानून उन पर भी लागू होने चाहिए. इसके लिए आर्टिकल 370 को हटाना होगा.”

शिवसेना ने सामना में लिखा गया है कि, फिलहाल कश्मीर में राष्ट्रपति शासन जारी है। जल्द ही अमरनाथ यात्रा शुरू होगी। अमरनाथ यात्रा शांति से संपन्न हो और उसके बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा का चुनाव कराया जाए, ऐसा माहौल दिखाई दे रहा है। अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा सीटों का ‘भूगोल’ बदलना तय किया है और जम्मू-कश्मीर का अगला मुख्यमंत्री हिंदू ही होगा, इसके लिए मतदाता क्षेत्रों का परिसीमन अर्थात डिलिमिटेशन करना तय किया है। सरकारी स्तर पर इसकी आधिकारिक रूप से पुष्टि भले ही न हुई हो, फिर भी नए गृहमंत्री ने सरकार का इरादा अप्रत्यक्ष तरीके से स्पष्ट कर दिया है यह निश्चित ही कहा जा सकता है।

इसके अलावा पार्टी ने लिखा है, ”राज्य (जम्मू-कश्मीर) में अब तक की राजनीति मुस्लिम जनसंख्या को खुश रखने के दबाव में होती रही है. परिसीमन का विरोध किया जाता है ताकि वहां कभी भी कोई हिंदू मुख्यमंत्री ना चुना जा सके.”

शिवसेना ने ऐसे समय में जम्मू-कश्मीर में परिसीमन पर जोर दिया है, जब कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर जल्दी से आगे बढ़ने की बात कही है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई ने बुधवार को कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया को कम से कम समय में पूरा किया जाना चाहिए. जम्मू-कश्मीर कांग्रेस का यह बयान उन खबरों के बाद आया, जिनमें कहा गया कि केंद्र सरकार विधानसभा क्षेत्रों के दायरे और आकार के फिर से निर्धारण के लिए परिसीमन आयोग गठित करने पर विचार कर रही है.

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