अब हमारे मिसाइलों को रोकने का सिस्टम इजरायल के पास नहीं है- फलस्तीनी संघर्षकरता

अब हमारे मिसाइलों को रोकने का सिस्टम इजरायल के पास नहीं है- फलस्तीनी संघर्षकरता

इस्राईल के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार याक़ूफ़ अमीदरोर का एक बयान इस्राईली मीडिया में गश्त कर रहा है जिसमें उन्होंने कहा है कि पूरे इस्राईल में सपोर्ट सिस्टम गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है।

जेरुज़्लम पोस्ट इस बातचीत में जनरल अमीदरोर ने कहा कि अगर कुछ किलोमीटर दूरी पर मौजूद टारगेट को भेदने के लिए मिसाइल फ़ायर किया गया तो इस्राईल के पास उसे रोकने का कोई सिस्टम नहीं है।

दूसरी ओर एक बड़ी समस्या यह है कि हमास और अन्य फ़िलिस्तीनी संगठन ग़ज़्ज़ा के भीतर मिसाइल बना रहे हैं और इन संगठनों ने अपनी संगठनात्मक शक्ति तथा सामरिक शक्ति बढ़ाने के लिए जो क़दम उठाए हैं वह गहरी चिंता का विषय हैं।

अकेले हमास संगठन के पास कम से कम 3500 मिसाइल मौजूद हैं जबकि आक्रामक सुरंगे खोदने की हमास की तकनीक भी इस्राईल के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है।

सबसे बड़ी बात यह हुई है कि हमास और जेहादे इस्लामी संगठनों ने जो क्षमताएं हासिल कर ली हैं उनके बारे में इस्राईल कभी सोच भी नहीं सकता था इसीलिए किसी भी प्रकार की झड़प होने की स्थिति में फ़िलिस्तीनी संगठन अपनी क्षमताओं से इस्राईल को हतप्रभ कर देते हैं।

इस्राईल में अब यह बात हो रही है कि हमास और हिज़्बुल्लाह जैसे संगठनों को पराजित करने के लिए इस्राईल को सड़कों और गलियों के भीतर युद्ध करना पड़ेगा और यह इस्राईली सैनिकों के लिए संभव नहीं है।

क्योंकि फ़िलिस्तीनी संगठन हमास के संघर्षकर्ताओं की लड़ाई का अंदाज़ बिल्कुल अलग है और इस्राईली सैनिक जिस समय लड़ते हैं तो काफ़ी डरे हुए होते हैं।

हिज़्बुल्लाह के बारे में इस्राईल को पहले ही यकीन हो चुका है कि उसे पराजित करना उसके बस की बात नहीं है और अब धीरे धीरे हमास भी उसी स्थिति में पहुंच चुका है।

इस्राईल को हालिया छह महीनों के भीतर होने वाली दो झड़पों में पूरी तरह यक़ीन हो चुका है कि सैनिक टकराव में हमास को परास्त कर पाना उसके बस की बात नहीं है। इस्राईल ने अमरीका सहित पश्चिमी देशों और क्षेत्र के अरब देशों के साथ मिलकर अपनी स्थिति मज़बूत करने की कोशिश की थी।

पार्स टुडे डॉट कॉम के अनुसार, इस्राईल ने धीरे धीरे क्षेत्र के अनेक अरब सरकारों की कमज़ोरियां खोज ली थीं और इस रणनीति के तहत उसने अरब सरकारों पर दबाव डाल कर अपनी मांगें मनवा लीं मगर इस बीच एक बड़ा बदलाव यह हुआ कि जनकेन्द्रित संगठन अस्तित्व में आ गए जिनकी क्षमताएं अपार हैं और जिनकी कमज़ोरियां तलाश कर पाना असंभव है क्योंकि वह एश्वर्य पूर्ण जीवन व्यतीत करने के बजाए बहुत सामान्य जीवन व्यतीत करते हैं और शहादत के जज़्बे के साथ लड़ते हैं।

इन संगठनों के हाथों इस्राईल को बार बार पराजय का मुंह देखना पड़ रहा है और दूसरी ओर पूरे पश्चिमी एशिया के इलाक़े में इन संगठनों की पैठ बढ़ती जा रही है। लेबनान में हिज़्बुल्लाह, फ़िलिस्तीन में हमास और जेहादे इस्लामी, इराक़ में हश्दुश्शअबी और यमन में अंसारुल्लाह सहित अनेक उदाहरण हैं जो इस्राईल और उसके समर्थकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं।

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