अल्लाह की याद से ही शैतान से बचा जा सकता है

गुलबर्गा 24 मई: शैतान जिन्नात में से होने की वजह से इंसानों जैसी बाइख़तियार मख़लूक़ है। इसी वजह से इस ने अल्लाह ताला के हुक्म कि आदम आगे सजदा करो का इनकार क्या इस घमंड में कि इंसान इस से कमतर और इस से ज़्यादा फ़ज़ीलत वाली मख़लूक़ नहीं है।

इस ने अल्लाह ताला से क़ियामत तक मोहलत ली कि वो इंसानों के बहकायेगा और बता देगा कि जो मुक़ाम उस को दिया जा रहा है वो इस के मुस्तहिक़ नहीं है।

लिहाज़ा रोज़ अव्वल से ही वो इंसान का खुला दुश्मन चला आरहा है । इन ख़्यालात का इज़हार मुहम्मद ज़िया उल्लाह, साबिक़ अमीर मुक़ामी ने मस्जिद एवान-ए-शाही में मुनाक़िद हुए जमात-ए-इस्लामी हिंद गुलबर्गा के हफ़तावारी मर्कज़ी इजतिमा में ” शैतान इंसान का खुला दुश्मन ” उनवान पर ख़िताब करते हुए किया।

शैतान इंसान को सब में पहले अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल करा देता है और मुआशरे में मकर-ओ-फ़रेब फैलाता है, अपने मुआमलात को अल्लाह के हवाले करने के बजाये ताग़ूत से रुजू कराता है, आरज़ुओं में उलझाता है, बुरे काम जैसे शराब, जोह, आस्थाने, पांसे जैसे कामों में लगाता है।

लोगों के दरमयान अदावत डालता है और अल्लाह के ज़िक्र और नमाज़ से रोकता है। फ़हश और बदी का हुक्म देता है , शौहर और बीवी में दराड़ें डालता है,भाईयों के दरमियां तफ़र्रुक़ा पैदा करता है।हर अच्छे काम को कमतर और हर बुरे काम को अच्छा बना कर पेश करता है।

उल-ग़र्ज़ इंसान के पीछे लगा रहता है और हर वो काम कराने की कोशिश करता है जिस के ज़रये बंदा अल्लाह से दूर होजाए। मुहम्मद ज़िया उल्लाह ने कहा कि हक़ीक़त में शैतान इंसान से कमतर मख़लूक़ है इस लिए इंसान को इस से नहीं डरना चाहीए। सिर्फ़ अल्लाह के ज़िक्र और उस की याद के ज़रीये इस से बचा जा सकता है।

इस से पहले सूरत अलबक़रा की आयात 254-255 पर दरस क़ुरआन देते हुए सयद हुस्न इनामदार, रुक्न जमात ने कहा कि अल्लाह चाहता है कि अहल ईमान अल्लाह के दीन की ख़ातिर इस का अता करदा माल उस की राह में अल्लाह की मर्ज़ी के मुताबिक़ ख़र्च करना हक़ीक़त में एक सआदत है और इस का अज्र बेइंतिहा मिलता है।

आयत-ऊल- कुरअन की रोशनी में कहा कि अल्लाह ताली इन तमाम नक़ाइस से पाक है जिन का तसव्वुर इंसान कर सकता है। डक्टर मुहम्मद सलाह उद्दीन रुकन जमात ने इंसानी ज़िंदगी पर ईमान के असरातपर दरस हदीस पेश किया।