इन तीन लोगों की वजह से दीदी की गढ़ में बीजेपी ने लगाई सेंध

इन तीन लोगों की वजह से दीदी की गढ़ में बीजेपी ने लगाई सेंध

कोलकाता : कहा जाता है की घर का भेदी लंका ढाए और यही दीदी के साथ हुआ। भाजपा ने बंगाल में जीत का जो चमत्कार किया है इसमें पार्टी के महासचिव व बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय के साथ ही टीएमसी के मुकुल रॉय और सोशल मीडिया के धुरंधर उज्ज्वल पारिक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बंगाल लोकसभा चुनाव में जीत के बाद हीरो बने मुकल रॉय भाजपा में शामिल होने से पहले टीएमसी में नंबर 2 की पोजिशन पर हुआ करते थे। मुकुल नवंबर 2017 में भाजपा में शामिल हुए थे। राज्य में भाजपा में मुकुल का शामिल होना हाथ में गिफ्ट मिलने के समान था। राज्य के भाजपा पदाधिकारी साफ रूप से इस बात को स्वीकार करते हैं कि बंगाल की जीत मुकुल रॉय की कुशल रणनीति का ही परिणाम है। राज्य के भाजपा महासचिव राजू बनर्जी कहते हैं कि मुकुल टीएमसी के नेताओं में अविश्वास की स्थिति फैलाने में पूरी तरह से सफल रहे।

इसके साथ ही वह टीएमसी के एक धड़े के भाजपा में शामिल होने के सूत्रधार भी रहे। मुकुल राय ही वो शख्स से जो चुनाव आयोग से राज्य भाजपा की तरफ से बातचीत करते थे। वे लगातार चुनाव आयोग के संपर्क में रहकर तृणमूल कांग्रेस की तरफ से रची जा रही हिंसा की साजिश से आयोग को अवगत कराया। राज्य भाजपा सचिव रितेश तिवारी कहते हैं कि मुकुल रॉय के कारण ही राज्य में होने वाले लोकसभा चुनाव के दौरान 100 फीसदी केंद्रीय बलों की तैनाती सुनिश्चित हो सकी। इस सफलता का ही यह सबूत है कि भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करने वाले मुकुल रॉय अकेले नेता थे।

दूसरी तरफ राज्य भाजपा प्रभारी व राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का भी इस जीत में अहम योगदान रहा। कैलाश को पार्टी ने भोपाल से चुनाव लड़ने की पेशकश की थी लेकिन उन्होंने बंगाल में पार्टी के लिए काम करने को तरजीह दी। विजयवर्गीय ने ही पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को दिलीप घोष को प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त कराने के लिए राजी किया था।

बंगाल की जीत में भाजपा के आईटी और सोशल मीडिया मैनेजर 39 साल के उज्ज्वल पारिक का भी अहम योगदान रहा। बंगाल में पार्टी की जीत पर उज्ज्वल ने कहा, मेरा उद्देश्य पीएम मोदी के संदेश को सोशल मीडिया के जरिये लोगों तक पहुंचाना था। मैं इसे वाट्सएप इलेक्शन कहूंगा। पारिक ने कहा कि हमने इस चुनाव में वाट्सएप का बेहतरीन तरीके से प्रयोग किया। हमने बंगाल में 50 हजार वाट्सएप ग्रुप के जरिये अपना अभियान चलाया जो गेमचेंजर रहा।

साभार : जनसत्ता

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