हैदराबाद । ( सियासत न्यूज़) क़ादियानीयों के ख़िलाफ़ हर महाज़ पर जंग के लिए उलेमा हरवक़त तैयार रहे हैं । क़ादियानीयों से क़ानूनी जंग में जानबूज कर पहल नहीं की गई थी और इंतिज़ार कर रहे थे । ख़ुद कादयानी क़ानूनी जंग के लिए पहल करें । क़ादियानीयों के ख़िलाफ़ महाज़ आराई के लिए हरवक़त चौक्कस-ओ-चौकन्ना रहने के इलावा उन की हर हरकत पर नज़र रखते हुए जंग की जानी चाहिए ।
क़ादियानीयों की जानिब से अदालत से रुजू होते हुए वक़्फ़ बोर्ड के फ़ैसला पर हुक्म इल्तीवा हासिल किए जाने के बाद आइन्दा हिक्मत-ए-अमली के लिए मुनाक़िदा इज्लास में उलेमा ए कीराम ने इन ख़्यालात का इज्हार किया ।
इज्लास में शरीक मौलाना अब्दुल कवी , मौलाना अबदूल मूग्नी मज़ाहिरी , मौलाना नसीर उद्दीन , जनाब इक्बाल अहमद इंजीनीयर , जनाब मुहम्मद अज़हर उद्दीन , जनाब हामिद मुहम्मद ख़ान , मौलाना ग़यास रहमानी , मौलाना सुहेल क़ासमी , मौलाना अरशद क़ासिमी , क़ाज़ी अज़मत उल्लाह जाफरी , जनाब मुजाहिद हाश्मी , जनाब अबूबकर हक़्क़ानी , जनाब उसमान बिन मुहम्मद अल हाजरी , जनाब फ़ारूक़ अली ख़ान एडवोकेट , जनाब ख़लीक़ उर्रेहमान , जनाब फ़ारूक़ सलाह उद्दीन एडवोकेट के इलावा दीगर ने अपने ख़िताब के दौरान इज्लास में क़ानूनी चाराजोई के मुताल्लिक़ राय पेश करते हुए कहा कि उलेमा और वुकला की एक टीम बनाए जाने की ज़रूरत है चूँकि जिस महाज़ पर क़ादियानीयों से मुक़ाबला है इस महाज़ पर मुक़ाबला हिंदूस्तान में क़ादियानीयों के मुस्तक्बिल का फ़ैसला साबित होगा इसी लिए इस अदालती चाराजोई में अहल ईमान को हत्तलइम्कान एहतियात के साथ अपने वुकला के ज़रीया अपना इद्दिआ अदालत में पेश करना चाहिये ।
इज्लास की सदारत जनाब मुनीर उद्दीन मुख़तार ने की । जनाब मुहम्मद फ़ारूक़ आज़म इस इज्लास के कन्वीनर थे जिन्हों ने कार्रवाई चलाई । उलेमा ने इज्लास से ख़िताब के दौरान बताया कि क़ादियानीयों ने अदालत से रुजू होते हुए अपना कुफ्र पेश कर दिया है अब हमें अपना ईमान साबित करना है । इसी लिए अब उलेमा को खुल कर इस मसला पर मवाद इकट्ठा करते हुए वुकला को फ़राहम करना चाहिये ।
मौलाना अबदुल मूग्नी मज़ाहीरी ने अपने ख़िताब के दौरान बताया कि जिन हालात में कादयानी अपने बातिल अक़ीदा की तब्लीग़ कर रहे थे इस से उन्हों ने अब अदालत में पेश करते हुए ये साबित करदिया कि वो अक़ाइद बातिला के मानने वाले हैं । इस एतबार से वो मुसल्मान नहीं हो सकते ।
उन्हों ने बताया कि अगर मुस्लिम वुकला को सही तौर पर मज़हबी अक़ीदा और अक़ीदा ख़त्म ए नबुव्वत के एतबार से तैयार करते हुए बेहस करवाई जाए तो मुक़द्दमा बड़ा आसान हो जाएगा ।
मौलाना अब्दुल कवी ने इस मौक़ा पर बताया कि इस महाज़ पर जंग के लिए मुत्तहिदा हिक्मत-ए-अमली की ज़रूरत है । उन्हों ने वाज़िह किया कि चीदा चीदा दरख़ास्तों के इदख़ाल की सूरत में मुक़द्दमा में खामियां पैदा होसकती हैं इसी लिए मुत्तहिदा तौर पर काबुल वुकला के प्यानल के ज़रीया हमें अदालत में क़ादियानीयों के कुफ्र को साबित करना चाहिये ।
मौलाना अब्दुल कवी ने कहा कि जो सूरत-ए-हाल आज पैदा हुई है उसे मल्हूज़ रखते हुए हमें मस्लकी इख़तिलाफ़ात से बालातर होकर अक़ीदा ख़त्म ए नबुव्वत के तहफ़्फ़ुज़ के लिए आगे आना चाहिये ।
जनाब इक़बाल अहमद इंजीनीयर क़ादियानीयों की जानिब से दाख़िल कर्दा दावे के इक्तेबासात का तज्किरा करते हुए कहा कि ख़ुद
कादयानी इस बात की दलील देने लगे हैं कि वो इस्लाम को एक मुकम्मल आफ़ाक़ी मज़हब नहीं मानते बल्कि उन का अक़ीदा ये है कि ग़ुलाम अहमद ने इस्लाम में इस्लाहात लाए हैं जो कि इंतिहाई बातिल-ओ-कुफ़रीया अक़ीदा है । उन के इस एतराफ़ से ये बात वाज़िह होजाती है कि उन्हें अपने मज़हब की तब्लीग़ के लिए मुकम्मल इख्तेयार है लेकिन वो मुसल्मान होने और इस्लाम के मानने वाले होने का दावा नहीं कर सक्ते और ना ही ख़ुद को अहमदी कहलाने का उन्हें हक़ हासिल है ।
उन्हों ने क़ानूनी चाराजोई के दौरान इंतिहाई चौक्सी बरतने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया ।
मौलाना नसीरउद्दीन ने इस मौक़ा पर अपने ख़िताब के दौरान अक़ीदा ख़त्म ए नबुव्वत के तहफ़्फ़ुज़ और मुस्लमानों की ज़िम्मेदारीयों का तज़किरा करते हुए कहा कि अक़ीदा ख़त्म ए नबुव्वत के तहफ़्फ़ुज़ के लिए हर मुसल्मान को तैयार रहना चाहिये । इस मौक़ा पर मौजूद शुरका ने भी तजावीज़ पेश करते हुए बताया कि क़ादियानीयों के ख़िलाफ़ महाज़ आराई के लिए एक इज्लास के बजाए मुसल्सल इज्लासों के ज़रीया हिक्मत-ए-अमली तैयार करते हुए आगे बढ़ने की ज़रूरत है और अपनी शख़्सियत और ज़ात को अक़ीदा ख़त्म ए नबुव्वत के तहफ़्फ़ुज़ के लिए क़ुर्बान करने तैयार रहना चाहिये ।
इज्लास में मौलाना सय्यद अहमद सईद कादरी , उफान कादरी के इलावा दीगर ने शिरकत करते हुए आइन्दा भी इस तरह के इज्लास मुनाक़िद करने का मश्वरा दिया ।
शुरका ए इज्लास बिलखुसूस उलेमा ने इस बात पर तवज्जा मब्ज़ूल करवाई कि क़ादियानीयों का पढ़ा लिखा तब्क़ा बातिल दलायल की रोशनी मैं ख़ुद को हक़ पर साबित करने की कोशिश करता है इस से चौकन्ना रहते हुए अपने वुकला को भी अक़ीदा ख़त्म ए नबुव्वत के मुताल्लिक़ तैयार करने की ज़रूरत है । इलावा अज़ीं इस तरह के इज्लासों के इलावा बंद कमरा के इज्लासों में भी हिक्मत-ए-अमली तैयार करना चाहिये ताकि हिक्मत-ए-अमली का इफ़शा ना होसके ।
आंधरा प्रदेश हाइकोर्ट की जानिब से वक़्फ़ बोर्ड की क़रारदाद पर आरिज़ी हुक्म इल्तीवा जारी किए जाने के बाद से अक़ीदा ख़त्म ए नबुव्वत के तहफ़्फ़ुज़ में सरगर्म तंज़ीमों ने मुख़्तलिफ़ ममालिक से राबिता क़ायम करते हुए क़ादियानीयों के ख़िलाफ़ आए फ़ैसलों की तफ़सीलात हासिल करली हैं । इलावा अज़ीं राबिता आलम ए इस्लामी ने भी मुत्तफ़िक़ा तौर पर क़ादियानीयों को ख़ारिज अज़ इस्लाम क़रार दिया है इस के बाद कोई गुंजाइश बाक़ी नहीं रह जाती ।
अदालत में क़ादियानीयों के झूटे इद्दिआ को ग़लत साबित करने के लिए हैदराबाद में काफ़ी मवाद मौजूद है इलावा अज़ीं ज़रूरत पड़ने पर रियासत की जमिआत और उलेमा इस सिलसिले में मवाद फ़राहम करने के लिए तैयार हैं । क़ादियानीयों के ख़िलाफ़ तहरीक में तआवुन के लिए जनाब उसमान बिन मुहम्मद अलहाजरी ने 50 हज़ार रुपया का अतीया देने का एलान किया ।