गीता को कैसे बना सकते हें क़ौमी ग्रंथ : स्वामी

मरकज़ी वज़ीर ए खारेज़ा सुषमा स्वराज ने इतवार के रोज़ लाल किला मैदान में गीता की 5151वीं सालगिरह पर कही थी कि इसे क़ौमी ग्रंथ ऐलान करने की बस फार्मिलीटी बाकी है लेकिन भारतीय जनता पार्टी के लीडर सुब्रमण्यम स्वामी का कहना था-ये कैसे हो सकता है। सुब्रमण्यम स्वामी के मुताबिक हिंदुस्तान एक कल्चर है, जो यह कहती है कि सभी मज़हबो से खुदा की हसूल मुम्किन है।

स्वामी ने इस बारे में बीबीसी से कहा,क़ौमी तराना जन गण मन और क़ौमी गीत वंदे मातरम की तरह गीता को क़ौमी ग्रंथ नहीं बनाया जा सकता क्योंकि ऐसा करने के लिए आईन में लिखे सेक्युलर लफ्ज़ को हटाना पडेगा। स्वामी के मुताबिक भगवत गीता एक ऐसा ग्रंथ है जिसे दुनिया भर में कई लोग पढते हैं।

स्वामी ने गीता को लाज़मी बनाए जाने की मुखालिफत करते हुए कहा,मैं तो कभी ताइद में नहीं हो सकता हूं कि कभी कोई मज़हबी किताब को लाज़मी बनाया जाए. एहतेराम करना दूसरी बात है और एहतेराम तो लोग गीता का वैसे भी करते हैं। स्वामी ने कहा है, उनसे जब बात होगी तो पूछूंगा कि ऐसा किस तरह से करेंगे क्योंकि इस पर अमल करने के लिए आईन में कोई दफआत नहीं है।