इसराईल और हम्मास के दरमयान जंग बंदी का ऐलान तो कर दिया गया है लेकिन ग़ज़ा में सूरत-ए-हाल अब भी इंतिहाई कशीदा है, इसराईल ने मुआहिदे के बावजूद ग़ज़ा की नाका बंदी ख़त्म करने से इनकार कर दिया है,
ग़ज़ा की सड़कें अब भी लहू से रंगीन हैं। ग़ज़ा के तक़रीबन हर घर में मातम बपा है, आठ रोज़ की वहशयाना बमबारी में 162 फ़लस्तीनी शहीद हुए।
हम्मास के सयासी बाज़ू के सरबराह ख़ालिद मशअल ने जब ऐलान किया कि ग़ज़ा वालों ने यहूदीयों का ग़रूर ख़ाक में मिला दिया तो ग़ज़ा में जश्न बपा होगया।
जंग बंदी से इसराईली ज़मीनी हमले का ख़तरा तो टल गया ताहम ग़ज़ा की नाका बंदी ताहाल बरक़रार है।