भाजपा को 190-210 सीटें मिलने का अनुमान, उत्तर प्रदेश में लग सकता है बड़ा झटका : रिपोर्ट

भाजपा को 190-210 सीटें मिलने का अनुमान, उत्तर प्रदेश में लग सकता है बड़ा झटका : रिपोर्ट

नई दिल्ली : आखिरी चरण के मतदान के साथ, एंबिट कैपिटल की एक हालिया रिपोर्ट बताती है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अखिल भारतीय आधार पर 190-210 सीटें जीतने की संभावना है। पार्टी को उत्तर प्रदेश में सीटों के लिहाज से बड़ा झटका लग सकता है। रिपोर्ट को लिखने वाले एंबिट कैपिटल की रितिका एम. मुखर्जी और सुमित शेखर का कहना कि लोकसभा चुनाव 2019 में एनडीए को मिलने वाले सीटों की संख्या 220-240 के आसपास रह सकती है। बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी इस रिपोर्ट के अनुसार एनडीए को उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक नुकसान होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा), समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के बीच चुनावी गठबंधन, यूपी में बीजेपी की सीट की गिनती में सेंध लगाने के लिए निश्चित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि “उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में राजनेताओं, छोटे व्यवसायों और शिक्षाविदों के साथ हमारी बैठक बताती है कि भाजपा राज्य में बड़े नुकसान के लिए नेतृत्व कर रही है। मोदी लहर के साथ स्पष्ट रूप से उत्सर्जित होने और समाजवादी पार्टी – बहुजन समाज पार्टी (सपा – बसपा) के गठबंधन में 40 से अधिक – 50 प्रतिशत वोटशेयर है, भाजपा केवल 30-35 सीटें सुरक्षित करने के लिए तैयार है“।

यहां मोदी लहर पूरी तरह से कमजोर है और समाजवादी पार्टी- बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन 40-50 फीसदी वोट शेयर हासिल कर रहा है। भाजपा को यहां 30-35 सीटें मिलने का अनुमान जताया जा रहा है। एंबिट कैपिटल का मानना ​​है, इसका मतलब है कि एनडीए को केंद्र में सरकार बनाने के लिए कम से कम चार बड़े क्षेत्रीय दलों के चुनाव के बाद साइन-अप करना होगा। उनकी जमीनी जाँच के आधार पर, मायावती के नेतृत्व वाली बसपा की नरेंद्र मोदी के साथ हाथ मिलाने की संभावना से इंकार नहीं करती है।

जमीनी हकीकत के आधार पर मायावती की पार्टी बसपा के नरेंद्र मोदी ने नेतृत्व वाली भाजपा से हाथ मिलाने की संभावना से भी इनकार नहीं कर रहे हैं। 2014 के वोट शेयर के आधार पर देखें तो मायावती की बसपा तीसरी सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी थी। हालांकि, वह पिछले लोकसभा चुनाव में एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो पाई थी। एंबिट की रिपोर्ट के अनुसार CY09 चुनाव आंकड़ों के अनुसार सपा और बसपा को मिलाकर वोट शेयर 51 फीसदी था, वहीं CY14 में यह वोट प्रतिशत 42 फीसदी थी।

घट सकता है भाजपा का वोट शेयरः यह मानते हुए इस बार मोदी लहर बिल्कुल कमजोर पड़ चुकी है, 2009 और 2014 के आधार पर इस बार सपा-बसपा को संयुक्त वोट शेयर 45 फीसदी हो सकता है। वहीं भाजपा का वोट शेयर 2019 के 42.6 फीसदी की तुलना में घटकर 34.2 फीसदी रहने का अनुमान है।

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