मुस्लिम नौजवानों के रोशन मुस्तक़बिल के लिए रिजर्वेशन ज़रूरी

मुस्लिम नौजवानों के रोशन मुस्तक़बिल के लिए रिजर्वेशन ज़रूरी

हैदराबाद 14 जुलाई: मुसलमानों की तालीमी और मआशी पसमांदगी का एतराफ़ हर सियासी जमात को है लेकिन जब वो इक़तिदार में आती है तो उसे मुसलमानों की तरक़्क़ी का ख़्याल नहीं होता। मुसलमानों की पसमांदगी के बारे में मुल्क की मुख़्तलिफ़ रियासतों में कमेटियां और कमीशन क़ायम किए गए जिनकी रिपोर्ट मुताल्लिक़ा रियास्तों में सरकारी फ़ाइलों की नज़र हो चुकी है।

पसमांदगी का ख़ातमा सिर्फ़ चंद स्कीमात के एलान से मुम्किन नहीं है बल्कि बुनियादी सतह पर तालीम और रोज़गार में तनासुब के एतबार से नुमाइंदगी के ज़रीये ही मुसलमानों के मुस्तक़बिल को रोशन बनाया जा सकता है। रिजर्वेशन के मुख़ालिफ़ीन ख़ुद ही निजी तौर पर इस बात को तस्लीम करते हैं कि मुस्लमान हर शोबे में दुसरे तबक़ात से पसमांदा है और उनकी तरक़्क़ी के लिए ठोस इक़दामात किए जाने चाहीए लेकिन हुकूमतों को इस हक़ीक़त का एतराफ़ उस वक़्त होता है जब हुकूमत की मीयाद आख़िरी मरहले में हो। इंतेख़ाबात से पहले और फिर हुकूमत की मीयाद के इख़तेताम से पहले मुसलमानों की तरक़्क़ी के बारे में कई वादे किए जाते हैं लेकिन ये वादे हक़ीक़त में बहुत कम तबदील होते हैं। दस्तूर और तालीम के माहिरीन ने भी तस्लीम किया है कि मुल्क में पिछ्ले 60 बरसों के दौरान हर हुकूमत ने मुसलमानों की तरक़्क़ी को नजरअंदाज़ किया।

मुत्तहदा आंध्र प्रदेश में विजय भास्कर रेड्डी ने बहैसीयत चीफ़ मिनिस्टर मुसलमानों को रिजर्वेशन की फ़राहमी के सिलसिले में पेशरफ़त की थी लेकिन हुकूमत की तबदीली के साथ ही ये मुआमला खटाई में पड़ गया। तेलुगू देशम पार्टी बरसर-ए-इक्तदार आने के बाद ना ही हुकूमत ने कोशिश की और ना अवाम की तरफ से कोई दबाओ बनाया गया, जिसके नतीजे में रिजर्वेशन का मसला पसेपुश्त डाल दिया गया।
आंध्र प्रदेश की तक़सीम और तेलंगाना रियासत के क़ियाम के बाद टीआरएस ने अपने चुनाव मंशूर में मुसलमानों को 12 फ़ीसद रिजर्वेशन की फ़राहमी का वादा किया और चीफ़ मिनिस्टर के चन्द्रशेखर राव‌ अभी भी अपने वादे पर क़ायम रहने का दावा कर रहे हैं। सियासत की तरफ से रिजर्वेशन के वादे की तकमील के सिलसिले में जो तहरीक शुरू की गई वो तमाम 10 अज़ला में अवामी तहरीक की शक्ल इख़तियार कर चुकी है। मुख़्तलिफ़ शोबा हाय हयात और हर सियासी, समाजी-ओ-मज़हबी जमात से ताल्लुक़ रखने वाले लोगों ने अवामी नुमाइंदों के अलावा एमआरओ से लेकर ज़िला कलेक्टर तक रिजर्वेशन के हक़ में नुमाइंदगी करते हुए टीआरएस हुकूमत पर दबाओ बनाया है।

हुकूमत ने एक लाख जायदादों पर तक़र्रुत का एलान किया और उनमें बाअज़ मह्कमाजात से तक़र्रुत का आलामीया जारी हो चुका है। हुकूमत की ज़िम्मेदारी है कि वो तमाम मह्कमाजात में मौजूदा 4 फ़ीसद रिजर्वेशन पर अमल आवरी को यक़ीनी बनाए और तमाम मख़लवा जायदादों पर तक़र्रुत से क़बल 12 फ़ीसद रिजर्वेशन पर अमल आवरी के इक़दामात करे।सरकारी मह्कमाजात में नाइंसाफ़ी और मवाक़े की कमी के सबब अक्सर-ओ-बेशतर आला तालीम-ए-याफ़ता मुस्लिम नौजवान भी ख़ानगी इदारों में मामूली मुलाज़मत पर मजबूर हैं।

पेशावराना कोर्सस में नुमायां मुज़ाहरे के बावजूद हुकूमत की अदम सरपरस्ती ने मुस्लिम नौजवानों को अपने मुस्तक़बिल के बारे में फ़िक्रमंद कर दिया है। हुकूमत को चाहीए कि वो सुप्रीमकोर्ट में 4 फ़ीसद रिजर्वेशन के ज़ेर अलतवा मुक़द्दमा की बेहतर पैरवी के साथ साथ दस्तूरी और क़ानूनी माहिरीन से मुशावरत का आग़ाज़ करे ताकि 12 फ़ीसद रिजर्वेशन पर अमल आवरी की राह तलाश की जा सके।

हुकूमत की तरफ से जो तरीका-ए-कार तए किया गया है वो रिजर्वेशन की बरक़रारी की ज़मानत नहीं बन सकता। लिहाज़ा टीआरएस हुकूमत को मुसलमानों के रोशन मुस्तक़बिल के वादे की तकमील के लिए दस्तूरी तरीका-ए-कार के मुताबिक़ रिजर्वेशन की फ़राहमी के इक़दामात करने होंगे। इस सिलसिले में तामिलनाडु हुकूमत से मुशावरत की जा सकती है, जिसमें 50 फ़ीसद की हद को उबूर करने के बावजूद रिजर्वेशन को बरक़रार रखने में कामयाबी हासिल की है।

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