यासीन शरीफ़ की तिलावत से मक़सद में कामयाबी

यासीन शरीफ़ की तिलावत से मक़सद में कामयाबी
हर अमल से पहले अव्वल-ओ-आख़िर तीन बार दरूद शरीफ़ लाज़िमी है। नमाज़ों की पाबंदी सख़्ती से कीजिए। किसी भी सूरत में किसी का दिल मत दुखाईए। टी वी हराम है, हमेशा इससे दूर रहिए।

हर अमल से पहले अव्वल-ओ-आख़िर तीन बार दरूद शरीफ़ लाज़िमी है। नमाज़ों की पाबंदी सख़्ती से कीजिए। किसी भी सूरत में किसी का दिल मत दुखाईए। टी वी हराम है, हमेशा इससे दूर रहिए।

निस्फ़ शब के बाद अच्छी तरह व़ुज़ू करके जुमेरात और जुमा की दरमियानी शब दो रकात नमाज़ तहज्जुद पढ़ कर बगै़र किसी से बात किए तीन बार दरूद शरीफ़ पढ़ कर मुस्सले पर खड़े हो जाएं और बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम पढ़ कर सूरह यसीन शरीफ़ की सात बार तिलावत इस तरह कीजिए कि जब जब लफ़्ज़ ए मुबीन पर पहुंचे तो सात बार लफ़्ज़ मुबीन को दुहराते हुए अपनी तिलावत जारी रखें।

जब तिलावत का सिलसिला ख़त्म हो जाये तो तीन बार दरूद शरीफ़ पढ़ कर बैठ जाएं और सर बसजूद होकर दुआ करें। जुमेरात-ओ-जुमा की दरमियानी शब अगर आप ये अमल जारी रखें तो इंशा अल्लाह तआला बहुत जल्द आप की हाजत पूरी हो जाएगी |

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