* 4.5 फ़ीसद सब कोटे के लिए सरकारी याददाश्त ,मुक़न्निना की ताईद और क़ानूनी एहमीयत से दुर, डीवीझ़न बंच का रीमार्क
नई दिल्ली (सियासत न्यूज़) मज़हब की बुनियाद पर अक़ल्लीयतों(अल्पसंख्यकों) को 4.5 फ़ीसद सब कोटा देने पर सुप्रीम कोर्ट ने हुकूमत से सवाल करते हुए इस फ़ैसले को रद करने से मुताल्लिक़ आंधरा प्रदेश हाइकोर्ट के फ़ैसले पर स्टे जारी करने से इनकार कर दिया है।
जस्टिस के.एस.राधा कृष्णन और जस्टिस जे.एस.खीहार कि बंच ने कहाकि हमें इस मसले पर स्टे जारी करने से कोई दिलचस्पी नहीं है। इस बंच ने इस दरख़ास्त गुज़ार के नाम भी नोटिस जारी की जिस ने मफ़ाद-ए-आम्मा के तहत दरख़ास्त दायर की थी।इस के बाद हाइकोर्ट ने आई आई टी जैसे केन्द्रीय तालीमी संस्थाओं में अन्य पिछ्डे लोग (ओ बी सी) के लिए तय 27 फ़ीसद रीजर्वेशन कोटे से अक़ल्लीयतों(अल्पसंख्यकों) को 4.5 फ़ीसद रीजर्वेशन देने से मुताल्लिक़ सब कोटे को रद कर दिया था।
मर्कज़ी वज़ारत फ़रोग़ इंसानी वसाइल() ने सब कोटे की बुनियाद की ताईद में तमाम ज़रूरी दस्तावेज़ पेश किए थे। सुप्रीम कोर्ट बंच ने रीजर्वेशन के सब कोटे को रद करने से मुताल्लिक़ आंधरा प्रदेश हाइकोर्ट के फ़ैसले पर स्टे जारी करने से इनकार करते हुए सवाल किया कि क्या आप मज़हब की बुनियाद पर ग्रुप बंदी कर सकते हैं? बंच ने कहाकि 22 डीसम्बर 2011 को सब कोटे पर जारी कि गई दफ़्तरी याददाश्त को मुक़न्निना की ताईद भी हासिल नहीं थी।
इस बंच ने दुसरे पिछ्डे लोग (ओ बी सी) कोटे से 4.5 फ़ीसद सब कोटा देने के हिसाब पर सवाल करते हुए हुकूमत से ये मालूम करना चाहा कि 4.5 फ़ीसद सब कोटा देने के लिए आया कोई दस्तूरी या क़ानूनी ताईद भी हासिल है। बंच ने कहाकि दूसरा सवाल ये है कि 4.5 फ़ीसद सब कोटे के बारे में कोई दस्तूरी या क़ानूनी ताईद हासिल है।
एडीशनल सोलीस्टर जनरल गौरब बनर्जी ने सुप्रीमकोर्ट को हाइकोर्ट के फ़ैसले पर स्टे जारी करने की ग़रज़ से अपनि दलील पर ग़ौर के लिए रज़ामंद करने की पूरी कोशिश की और कहाकि इस बात को मल्हूज़ रखा जाये कि आई आई टी काउंसलिंग जारी है जिस में अक़ल्लीयतों(अल्पसंख्यकों) के 4.5 फ़ीसद सब कोटे के तहत 325 उम्मीदवार हिस्सा लेंगे।लेकिन सुप्रीम कोर्ट बंच ने कहाकि उन्हें हाइकोर्ट के अहकाम पर स्टे जारी करने से कोई दिलचस्पी नहीं है और कहाकि ओ बी सी के लिए तय 27 फ़ीसद कोटे से 4.5 फ़ीसद सब कोटा तय करने का हिसाब किताब मुबहम और ग़ैर वाज़िह है।
बंच ने कहाकि अक़ल्लीयतों(अल्पसंख्यकों) को 4.5 फ़ीसद कोटा दिए जाने की सूरत में ओ बी सी पर असर पडेगा। सुप्रीम कोर्ट ने हुकूमत से फिर एक मर्तबा ये सवाल किया कि आया इस मसले पर क़ौमी अक़ल्लीयती कमीशन और पिछ्डे लोगों के क़ौमी कमीशन जैसे क़ानूनी एहमीयत के हामिल संस्थाओं से मश्वरा क्यों नहीं कीया गया।
बंच ने सवाल किया कि आप ने इन सी बी सी और उन सी एम को क्यों नजर अंदाज़ किया। ये दो इंतिहाई अहम क़ानूनी संस्थाए हैं। इस के बाद बंच ने केन्द्र से कहाकि कई जिल्दों को शामिल दस्तावेज़ जो इस के इजलास पर पेश कीये गए हैं उन्हें हाइकोर्ट में पेश किया जाना चाहीए था।
जब मिस्टर बनर्जी ने कहाकि हाईकोर्ट इस ख़्याल में था कि सब कोटा तमाम अक़ल्लीयतों(अल्पसंख्यकों) के लिए है। बंच ने ब्रहमी के साथ झुँझलाते हुए जवाब दिया कि ये सब कुछ इस लिए हुआ है कि दफ़्तरी याददाश्त में इस की झलक पाई गई। मिस्टर बनर्जी ने कहाकि ओ बी सी में जिन्हें 27 फ़ीसद कोटा दिया गया है इन में मज़हबी अक़ल्लीयतों(अल्पसंख्यकों) का अहाता भी किया गया है लेकिन 4.5 फ़ीसद का सब कोटा मुसलमानों के इलावा ईसाईयत क़बूल करने वालों और मुसलमानों के पिछ्डे लोगों के लिए तय किया गया था।
मिस्टर बनर्जी ने कहाकि 4.5 फ़ीसद सब कोटा की फ़हरिस्त में बुध और पार्सी शामिल नहीं हैं। उन्हों ने कहाकि ओबीसी में शामिल इन अक़ल्लीयतों(अल्पसंख्यकों) को 4.5 फ़ीसद सब कोटे के तहत रीजर्वेशन दिए जा रहे थे जो मज़हबी अक़ल्लीयत(अल्पसंख्यक) होने के साथ साथ समाजी और मआशी तौर पर बहुत जयादा पिछ्डे हुए हैं। जिस पर बंच ने कहाकि ये एक दुशवारी है और ये एक नुक़्ता भी है। हम ये समझ सकते हैं। इन में तमाम शामिल हैं। लेकिन आप ने किस हिसाब के मुताबिक़ ये तय किया है।
केन्द्र ने कल वो तमाम मवाद और दस्तावेज़ सुप्रीम कोर्ट में पेश किए थे जिन की बुनियाद पर अक़ल्लीयतों(अल्पसंख्यकों) को 4.5 फ़ीसद सब कोटा दिया गया था।