अपनी तंगी दूसरों पर ज़ाहिर ना करो

हज़रत अली करम अल्लाह वजहा से रिवायत हैके रसूल (स०)ने फ़रमाया जो शख़्स थोड़े से रिज़्क पर अल्लाह से राज़ी होता है (यानी अपनी मआशी ज़रूरीयात की क़लील मिक़दार पर क़नाअत करता है) तो अल्लाह ताअला इस से (ताआत-ओ-इबादात के) थोड़े से अमल पर राज़ी हो जाता है।

हज़रत इबन अब्बास रज़ी अल्लाहु तआला अनहु से रिवायत हैके रसूल (स०) ने फ़रमाया जो शख़्स भूका हो या (किसी चीज़ का) मुहताज हो और अपनी इस भूक-ओ-मुहताजी को लोगों से छुपाए (यानी खाने की तलब में किसी से ये ना कहे कि में भूका हूँ और ना मदद चाहने के लिए किसी से अपनी एहतियाज-ओ-ज़रूरत को बयान करे) तो अल्लाह ताअला का ये यक़ीनी वाअदा हैके वो उस शख़्स को हलाल तरीके पर एक साल का रिज़्क पहुंचाएगा। ( इन दोनों रवायात को बीहक़ी ने शाब उलाईमान में नक़ल किया है)

भूक से मुराद वो भूक है, जिस को बर्दाश्त करना मुम्किन हो और लोगों से इस का छुपाना नाजायज़ ना हो, क्यूंकि जो भूक नाक़ाबिल-ए-बर्दाश्त हद तक पहुंचाए और उसकी वजह से हलाकत का ख़ौफ़ हो तो एसी भूक को छुपाना जायज़ नहीं है।

इसी लिए उल्मा ने तसरीह की हैके अगर कोई शख़्स इस हालत में भूक की वजह से मर जाये कि ना तो इस ने किसी के सामने अपनी भूक का इज़हार करके खाने पीने के लिए कुछ मांगा हो और ना इस ने एसी कोई चीज़ ही खाई हो, जिस से ज़िंदगी बचाई जा सकती थी और बहालत मजबूरी जिस चीज़ के खाने की इजाज़त शरीयत ने दी है कि ख़ाह वो मुर्दार ही क्यों ना हो, तो उस शख़्स की मौत गुनहगार की मौत होगी।