अब आम होने को बेताब है बोधगया

बोधगया 9 जुलाई : इतवार की सुबह हुए नौ धमाकों ने बोधगया में आम ज़िन्दगी को बेपटरी कर दिया। न केवल बोधगया के रिहायसियों पर, बल्कि बाहर से भी बोधगया आये लोगों पर इसका असर वाजेह दिखा। इतवार की वाकिया के बाद पूरा दिन बीता नहीं कि बोधगया के लोगों में आम होने की बेचैनी दिखने लगी।

सुबह से ही हर लोग बोधगया में महाबोधि मंदिर की सिम्त में बढ़ना चाह रहा था। इतवार की वाकिया के बाद पीर आते-आते लोगों में घुटन की सूरत हाल पैदा हो गयी। स्टार क्लब के मेंबर राकेश कुमार पप्पू ने पीर को कहा, ‘बहुत हो गया भाई। अब तो जीने दो। रोज की तरह रहने दो।’

इस दरमियान बोधगया में धमाकों के खिलाफ पीर के दिन बंद ने बोधगया की हालत को थोड़ा और नाजुक बना दिया था। पहले लोग इतवार को धमाके के चलते परेशान हुए। ताफ्सिश कामों में लगे पुलिस अहलकारों और दीगर एजेंसियों के चलते किनारे थे। पीर के दिन बंद ने रही-सही कमी पूरी कर दी। आमलोगों हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। ताजिर हसीमुल हक ने कहा, ‘पहले तो धमाके से परेशान हुए, अब बंद कसर निकाल रहा है। ऐसी हालत में भला आदमी क्या कमायेगा, क्या खायेगा?’ हालांकि, पीर दोपहर तक सैकड़ों की संख्या में मुकामी लोग मंदिर के आसपास मंडराने लगे थे। दरअसल सब जानना चाह रहे थे कि मंदिर फिर कब खुल रहा है?

वैसे, बोधगया की हालत आम देखने के ख्वाह लोगों की मुरादें शाम होते-होते पूरी भी होने लगीं। पांच बजे बौद्ध भिक्षुओं का बड़ा दल मंदिर अहाते में घुसा। खुसूसी पूजा हुई। बोधि पेड़ के नीचे अमन के लिए दुआ हुई। इंतेजामिया अफसर भी प्रोग्राम में शामिल हुए। फिर क्या था। इसके बाद अब आमलोगों की बारी थी।

छह बजे आम मुसाफिरों के लिए मंदिर का गेट खोल दिया गया। इससे बाहर से फ़लसफ़ा के लिए आये लोगों को तो सहुलत हुई ही, मुकामी लोगों ने भी राहत की सांस ली। उधर, महाबोधि मंदिर से सटे जगन्नाथ मंदिर अहाते में “रथ यात्रा” की वसीह तैयारी जारी है। माना जा रहा है कि 10 जुलाई को तजवीज रथयात्रा पूरी तरह आम माहौल में ही पूरे जोश के साथ निकाली जायेगी। इसके लिए बंद के दरमियान ही जगन्नाथ मंदिर इंतेजामिया की तरफ से रथयात्रा प्रोग्राम को लेकर तबलीग बाजी भी चलाया गया।