श्रीनगर: मुफ्ती की हुकूमत ने नया मसला खड़ा कर दिया है. एक नयी हिदायत जारी कर कहा है कि क़ौमी पर्चम से साथ जम्मू-कश्मीर का पर्चम लगाना जरूरी है. अगर इस पर्चम (झंडे) को नहीं फहराया गया तो इसे नियम की खिलाफवर्जी माना जाएगा.
दरअसल, मुफ्ती सरकार ने नया नियम लागू करने के पीछे 1952 के दिल्ली समझौते को वजह बताया है. ताजा हुक्म के बाद सरकारी अमले ने सरकारी इमारतों और ओहदेदारों की गाड़ियों पर क़ौमी पर्चम के साथ रियासत का पर्चम लगाने की तैयारियां शुरू कर दी है.
एक अफसर ने बताया कि 1952 के दिल्ली समझौते के तहत रियासत के पर्चम का मुकाम क़ौमी पर्चम से कम नहीं. यह समझौता साबिक वज़ीर ए आज़म जवाहर लाल नेहरू और जम्मू कश्मीर के उस वक्त के वज़ीर ए आला शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने जुलाई 1952 में साइन किया था.
उधर, ताजा मुतनाज़ा सामने आने के बाद बीजेपी का कहना है कि मुफ्ती सरकार के इस हुक्म पर पार्टी गौर करेगी, उसके बाद कोई कदम उठेगी.