अवामी उमंगों की तकमील, मर्कज़ पर रियासतों की हुक्मरानी नहीं

नई दिल्ली, 06 अप्रेल: जम्मू-ओ-कश्मीर से मरहला वार असास पर मुतनाज़ा मसलह अफ़्वाज (ख़ुसूसी इख़्तियारात) क़ानून की बर्ख़ास्तगी और तवानाई पराजेक्टों की वापसी रियासती चीफ़ मिनिस्टर उमर अबदुल्लाह की दो इंतिहाई अहम ख़ाहिशात हैं। माईंड माइन समीत 2013‍ में हिस्सा लेते हुए 43 साला उमर अबदुल्लाह ने इन ख़ाहिशात का इज़हार उस वक़्त किया जब उन से अपनी ऐसी दो अहम ख़ाहिशात का इज़हार करने की ख़ाहिश की गई थी जिन की वो तकमील चाहते हैं।

उमर अबदुल्लाह ने कहा कि अगर मुझे दो चीज़ों का इंतिख़ाब करना पड़ा तो पहली ये होगी कि मेरी रियासत से मसलह अफ़्वाज के ख़ुसूसी इख़्तियारात का क़ानून मरहला वार असास पर वापिस लिया जाये और दूसरी ख़ाहिश ये होगी कि रंगा राजन कमेटी की तरफ़ से सिफ़ारिश करदा एन एच पी सी तवानाई पराजेक्ट दुबारा इस रियासत को हासिल होजाएं। वाज़िह रहे कि उमर अबदुल्लाह ने अपनी हुकूमत के क़ियाम के बाद से मुसलसिल इस बात पर इसरार किया है कि ए एफ़ एस पी ए क़ानून से मरहला वार असास पर दस्तबरदारी इख़तियार की जाये।

उन्होंने कहा कि नामुनासिब और ग़ैर मौज़ूं तरीक़ों से सयासी मसाइल से निमटने की कोशिशें सूरते हाल को मज़ीद पेचीदा बनादेती हैं। उमर अबदुल्लाह ने कहा कि माज़ी में जम्मू-ओ-कश्मीर के वज़ीरे आज़म शेख़ अबदुल्लाह को गिरफ़्तार किया गया था और बड़े पैमाने पर ग़ैर जमहूरी इक़दामात किए गए थे जिस के नतीजे में सूरते हाल बड़ी हद तक पेचीदा होगई थी,और अवाम ख़ुद को सब से अलग महसूस करने लगे थे।

इस सवाल पर कि आया रियासतें, दिल्ली (मर्कज़) पर हुकूमत कर रही हैं। उमर अबदुल्लाह ने कहा कि मर्कज़ और रियासतों के उमूर चलाने के लिए दस्तूरी मौक़िफ़ का एक जामि ढांचा मौजूद है,और मर्कज़ी हुकूमत की सतह पर रियासतों के अवाम की उमंगों की तकमील करना किसी भी सूरत में ये नहीं कहलाया जा सकता कि रियासतें मर्कज़ पर हुकूमत कर रही है। उन्होंने कहा कि जम्मू-ओ-कश्मीर की सूरते हाल ख़ुसूसी मौक़िफ़ की हामिल है।

सिर्फ़ मुवासलात, करंसी, दिफ़ा और ख़ारिजी उमूर का इंडियन यूनियन में इंज़िमाम हुआ था जो गुज़िश्ता चंद बरसों के दौरान मानद पढ़ गया चुनांचे कुछ मुज़ाहिमत भी हुई। आप को इस से निमटना होगा। आप को अवाम के दिल जीतना होगा। उमर अबदुल्लाह ने कहा कि वादी कश्मीर में दस्ती घड़ी बांधना भी ज़िंदगी और मौत का सवाल बन गया है क्योंकि सेक्यूरिटी फोर्सेस चाहते हैं कि अपनी घड़ियों में हिन्दुस्तानी मयारी वक़्त रखें जबकि आलैहदगी पसंद इस पर बात पर इसरार करते हैं कि वो अपनी घड़ियों में पाकिस्तानी वक़्त रखें।

उमर अबदुल्लाह ने मज़ीद कहा कि अगर आप ख़ौफ़-ओ-दहश्त के माहौल में ज़िंदगी गुज़ारते रहें और जब किसी सुबह आप अपने घर से बाहर निकले तो आप को ये भी मालूम नहीं कहता कि आया 25 साल बाद भी आप अपने घर वापिस हो सकेंगे या नहीं।