बैनुल अक़वामी क्रीमिनल कोर्ट के 122 रुक्न ममालिक की कान्फ़्रैंस में फ़लस्तीनियों को बाक़ायदा तौर पर मुबस्सरीन बनाया गया है जिस के बारे में कहा जा रहा है कि ये एक ऐसा इक़दाम है जिस ने उन्हें आलमी सतह पर किए जाने वाले जंगी जराइम के ट्रब्यूनल का मुस्तक़िल रुक्न बना दिया है।
सदर फ़लस्तीन महमूद अब्बास ने इंतिबाह दिया था कि वो आई सी सी की रक्नीयत अख़्तियार करेंगे ताकि इसराईल पर मबनी जंगी जराइम के इल्ज़ामात आइद करने दबाव डाला जा सके।
अक़वामे मुत्तहिदा के फ़लस्तीनी सफ़ीर रियाज़ मंसूर ने कहा कि उन की हुकूमत उसी जानिब पेशरफ़्त कर रही है लेकिन इस मुआमला में पेशरफ़्त एक दीगर मुआमला है जिस के लिए मुनासिब वक़्त का फैसला मिस्टर अब्बास करेंगे।
इस फ़ेहरिस्त में रूस, चीन, हिंदुस्तान और फ़लस्तीनी रियासत शामिल है। इन तमाम मुल्कों को इत्तिफ़ाक़े राय से दावत दी गई थी। फ़लस्तीनीयों को मुबस्सिर के तौर पर दावत देने पर भी किसी ने एतराज़ नहीं किया है।