पटना 8 जुलाई : इशरत जहां का बिहार कनेक्शन सामने आया है। उसके दादा पटना से सटे खगौल में रहते थे तो नाना आलमगंज थाना में। इशरत के मामा पटना एआइटी में काम करते हैं और फिलहाल इशरत की मां शमीमा कौसर से मिलने के लिए अहमदाबाद गये हैं। इशरत जहां ने बिहार के मुंगेर में बचपन बिताया था। वह क्लास दो तक मुंगेर के जमालपुर में संत राबर्ट स्कूल में पढ़ी थी।
इशरत को लेकर यहां कई लोगों की यादें जुड़ी हुई हैं। इशरत की दो बहनें पटना में अपने मामा के पास रहकर पढ़ाई कर रही हैं। दहशतगर्द तार से जुड़े रहने के इलज़ाम जब उस पर चस्पां हुए तो जान-पहचान के लोगों ने इस खानदान से मुंह मोड़ लिया था। लोग समझते थे कि कौन इस लफड़े में पड़े। इस दौरान उसके मामा मुजीबुर रहमान इशरत के खानदान के साथ मजबूती से खड़े रहे।
बताया जाता है कि इशरत के वालिद शमीम रजा ने पटना में बैग का कारोबार किया था। धंधा नहीं चला तो मुंबई चले गये। शमीम रजा के वालिद यानी इशरत के दादा वली मोहम्मद उर्फ नन्हू मियां खगौल में रहते थे। उनका छोटा सा कारोबार था। वह यहां किराए के मकान में रहे। इशरत के नाना अब्दुल मजीद जमालपुर रेलवे कारखाने में मुलाजिम थे। पटना कॉलेज से ख़त व किताबत कोर्स से नफ्सियात पढ़ रहीं इशरत की बहन मोसर्रत जहां और नुसरत जहां अपने मामा के साथ वाल्दा से मिलने अहमदाबाद चली गयी हैं।
दरअसल, इशरत के वालिद की मौत के बाद उसकी दोनों बहनों को मामा ने ही अपने पास रखा और अपना फर्ज अदा किया। इशरत के मामा यहां जिस किराए के मकान में रहते हैं उसके मालिक हैं प्रो अब्दुल हई। हई साहब कहते हैं कि इशरत अपनी मां के साथ यहां आ चुकी हैं। फर्जी एनकाउंटर के बाद जो वबंडर उठा उसके रिश्तों को समझने का अलम दिया। कई अपने इस खानदान के लिए बेगाने हो गये। खगौल से लेकर आलमगंज और जमालपुर तक इशरत को लेकर बहस ए आम है। लोग इस खानदान के बारे में बात करते-करते नेस्टॉल्जिया में चले जाते हैं। उनके अब्बू, वालिद और एक-एक खानदान के मेम्बरों के बारे में सब बात करने लगते हैं।