उर्दू को सरकारी जुबान का दर्ज़ा हासिल लेकिन अमल कुछ भी नहीं

गया : मगध कमिश्नरी अंजुमन उर्दू असातिजा गया के जेनरल सेक्रेटरी फज़ल वारिस ने प्रेस रिलीज़ में कहा की बिहार में उर्दू को सरकारी जुबां का दर्ज़ा देने के बाद कानून उर्दू के मुकम्मिल अमल व नाफाज़ के लिए गवर्नर बिहार के हुक्म से महकमा राज़ भाषा बिहार सरकार ने 17 अप्रैल 19 81 को सरकार जारी किया जिसमें इस बात की हिदायत दी गयी के अहम् सायन बोर्डों का उर्दू में लिखा और लगाया जाना, इस सर्कार के जारी होने के बाद अनगिनत एह्कमात सूबा बिहार के मुतल्का इजला के डीएम, SDO और कमिश्नर को भेजे जाते हैं लेकिन हैरत की बात मुतल्का अफसरान ने मुकम्मिल तौर पर कानून उर्दू के नफाज़ के लिए राह हमवार नहीं किया। मसलन मगध कमिश्नरी ऑफिस का उर्दू बोर्ड कोई नहीं है. विकास भवन गया उर्दू में अब तक नहीं लिखा गया. गया का उर्दू सेल ख़त्म कर दिया गया. महकमा पुलीस की गाड़ियों में उर्दू को अब तक जगह नहीं दी गयी. 36 बरसों बाद भी हर सतह पर उर्दू फरामोश, महकमा तालीम बिल्खुसुस DEO ऑफिस में किसी जगह पर उर्दू को जगह नहीं दी गयी।

रफीक उर्दू सैयद फज़ल वारिस को खादिम उर्दू, समाज की जनि खिदमत गार सैयद आसिफ जफर ने एक गुफ्तुगू के दौरान बताया की प्राइमरी हेल्थ सेंटर मानपुर गया में रोगी कल्याण समीति की मीटिंग हॉस्पिटल मानपुर के इंचार्ज मिस्टर SN शर्मा की सदारत में हुई. सैयद आसिफ ज़फर ने मीटिंग में सवाल उठाया की इस हॉस्पिटल में कहीं उर्दू को जगह नहीं डी गयी है क्यों? अस्पताल के इंचार्ज ने जल्द ही हॉस्पिटल में उर्दू को जगह देने की यकीन दिहानी करायी। मिस्टर वारिस ने कहा की सैयद आसिफ ज़फर की तरह 5 और 10 आदमी भी हर ब्लाक, हर गाँव, हर शहर में मुस्तायिद हो जाएँ तो उर्दू का कानून महफूज़ रहेगा।