उर्दू में शायरी का मज़ा ही कुछ और है

शायरी सिर्फ़ उर्दू ज़बान में ही अच्छी लगती है जबकि दीगर ज़बानों में भी शायरी होती है लेकिन मुशायरे सिर्फ़ उर्दू के ही कामयाब होते हैं। इन ख़्यालात का इज़हार साबिक़ रियास्ती वज़ीर टी जीवन रेड्डी ने जगत्याल एजूकेशनल सुसाइटी की तरफ‌ से गुज़िश्ता रात रूबी फंक्शन प्लाज़ा में मुनाक़िदा कुल हिंद मुशायरा में मेहमान ख़ुसूसी की हैसियत से किया। हिंद मुशायरा ज़ेर-ए-सदारत क़ाज़ी मुहम्मद मक़सूद अली मतीन मुनाक़िद हुआ।

मुशायरा का आग़ाज़ मौलाना अब्दुलक़दीर हासमी की नात पाक से हुआ। इस मौके पर साबिक़ वज़ीर टी जीवन रेड्डी ने ख़िताब करते हुए कहा कि सरज़मीन जगत्याल पर बड़े पैमाने पर मुशायरे मुनाक़िद होते हैं और निहायत कामयाब होते हैं। उन्हों ने शायरी से ख़ुसूसी लगाव‌ का तज़किरा किया और उर्दू दोस्त अहबाब को शायरी में रहनुमाई करने की ख़ाहिश की।

रुकन एसंम्बली जगत्याल एल रमना ने मुख़ातब करते हुए कहा कि मुशायरे उर्दू की तरक़्क़ी-ओ-फ़रोग़ में मुआविन हैं। उन्होंने कहा कि मुशाइरों में शिरकत से वो इंतिहाई मुसर्रत हासिल करते हैं।

शोरा-ए-किराम मौलाना अब्दुलक़दीर हासमी, सरदार सुरेंद्र सिंह शेर पंजाब, जलाल मैकश भोपाल, हारून उसमानी बुरहान पर, इमरान रिफ़अत, मन्नान अफ़रोज़ ( जबलपूर ) शकील अहमद शकील ( मुंबई) साज़ इला आबादी, वसी इरशाद ( नासिक ), ग़ालिब आसी ( नांदेड़ ) मुहतरमा राणा तबस्सुम ( मुंबई ) ज़ीनत क़ुरैशी ( यू पी) संगीता सरल ( भोपाल) डाक्टर क़मर सुरूर ( अहमद नगर गुजरात) अंजुम देहलवी के अलावा मुईन अमर बंबू क़मर तलेर, कर्टीकल जगतयाली, वहीद पाशाह कादरी, शेख़ अहमद ज़िया ने अपने कलाम से सामईन को महज़ूज़ किया और ख़ूब दाद-ओ-तहसीन हासिल की।

शोरा-ए-सरदार सुरेंद्र सिंह शजर, इमरान रिफ़अत, मन्नान फ़राज़, जलाल मैकश, साज़इला आबादी, संगीता सरल, वहीद पाशाह कादरी ने ख़ूब दाद हासिल की। मुशायरा की निज़ामत के फ़राइज़ हारून उस‌मानी ने अंजाम दिए। मुशायरा सुबह चार बजे इख़तताम पज़ीर हुआ।