एक पत्थर को , जान बना बैठे
अपना सब कुछ तुझे बना बैठे
मेरी हर सांस में, रूह में तुम् हो
तुम को अपना जहां बना बैठे
किस कदर मेरा दिल ये प्यासा है
अपना ज़मज़म तुम्हे बना बैठे
रब से मांगा है तुम को मैने सदा
सारी दुनिया को हम भुला बैठे
कितना प्यारा है ये मेरा सपना
जिसको पलकों में हम सजा बैठे
तुम मिलो या, ना मिलो हमको
अपनी धड़कन तुम्हे बना बैठे
रब मेरे माफ कर दे मेरी खता
एक इंसान को क्या बना बैठे
——–हमीदा अमीर
———बशुक्रिया: shers.in