एनकाउंटर वाक़िया पर बोलने से टी आर एस के मुस्लिम क़ाइदीन का गुरेज़

नलगोन्डा के आलीर में 7 अप्रैल को 5 मुस्लिम नौजवानों की पुलिस के हाथों हलाकत के वाक़िया ने एक तरफ़ हुकूमत के बारे में अक़लीयतों में नाराज़गी का रुजहान पैदा किया है तो दूसरी तरफ़ पार्टी से ताल्लुक़ रखने वाले अक़लीयती क़ाइदीन भी इस मसअले पर हुकूमत के मौक़िफ़ से मुतमइन नहीं ताहम वो खुल कर इस का इज़हार करने से क़ासिर हैं।

बताया जाता है कि चीफ़ मिनिस्टर और उन के क़रीबी ज़राए ने पार्टी और हुकूमत में शामिल अक़लीयती क़ाइदीन को पाबंद किया है कि वो आलीर में मुस्लिम नौजवानों की हलाकत के मसअले पर अख़बारी ब्यानात और मीडिया में रायज़नी से गुरेज़ करें।

इस पाबंदी के बाद से टी आर एस से ताल्लुक़ रखने वाले क़ाइदीन मीडिया से दूर भाग रहे हैं। हद तो ये है कि वज़ीरे दाख़िला एन नरसिम्हा रेड्डी भी मुताल्लिक़ा महकमा के वज़ीर होने के बावजूद इस वाक़िया पर तबसरा से गुरेज़ कर रहे हैं।

उस की वजह ये है कि आलीर वाक़िया के सिलसिला में हुकूमत की सतह पर जो भी हिक्मते अमली तय की जा रही है इस में चीफ़ मिनिस्टर ने वज़ीरे दाख़िला को भी शामिल नहीं किया है इसी तरह काबीना में अक़लीयतों के नुमाइंदे की हैसियत से शामिल किए गए डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर मुहम्मद महमूद अली को भी एतेमाद में नहीं लिया गया।

हैरत तो इस बात पर है कि टी आर एस के ऐसे क़ाइदीन जो ख़ुद को अक़लीयतों का नुमाइंदा ज़ाहिर करते हैं वो इस वाक़िया पर ख़ामूश हैं लेकिन सरकारी ओहदों के हुसूल के लिए अभी भी मुख़्तलिफ़ आला क़ाइदीन और वुज़रा के पास अपनी पैरवी जारी रखे हुए हैं। इन क़ाइदीन को मुसलमानों की नाराज़गी से ज़्यादा सरकारी ओहदों की फ़िक्र है।