एम्बुलेंस सरविस 103 की नाक़िस कारकर्दगी

ज़िला में 108 अम्बो एम्बुलेंस कारकर्दगी हर ख़ास और आम की ज़बान पर है। मरीज़ों और हादेसात के ज़ख़मीयों की ज़िंदगीयां बचाने में 108 एम्बुलेंस का एहम किरदार रहा करता था।

लेकिन पिछ्ले कुछ अर्से से इन सरविसस की ख़िदमात बुरी तरह मुतास्सिर होचुकी हैं। बावसूक़ ज़राए के आदाद-ओ-शुमार के मुताबिक़ ज़िला के 64 मंडलों के लिए सिर्फ़ 31 एम्बुलेंस सरवीसस काम कररही हैं। मरीज़ों को दवाख़ाना मुंतक़ली के दौरान एम्बुलेंस में तिब्बी आलात और सहूलतों की अदमे मौजूदगी ज़िला भर के अवाम के लिए तशवीश का सबब बन चुके हैं।

कई एम्बुलेंस में ऑक्सीजन ही नहीं है जिन में ऑक्सीजन सलेंडरस हैं इस में ग़ियास की मिक़दार कम है या फिर ग़ियास ही नहीं है या फिर सलेंडर के रैगूलेटरस बेकार होचुके हैं।

ऐसे बेकार एम्बुलेंस ज़ख़मीयों और मरीज़ों की ज़िंदगीयों को क्या ख़ाक बचा सकते हैं। हाल ही में साबिक़ मर्कज़ी वज़ीर लीडर येरन नायडू की मौत भी अवाम में मौज़ू बेहस है कि उन्हें दवाख़ाना मुंतक़िल करने के लिए बरवक़्त एम्बुलेंस दस्तयाब नहीं हुई।

अवाम का कहना है के एक बड़े लीडर को मुंतक़िल करने के लिए एम्बुलेंस वक़्त पर दस्तयाब नहीं हुई तो अवाम के लिए ये वक़्त पर कैसे दस्तयाब होसकती है? ।

ज़िला के अवाम अर्सा से एम्बुलेंस की बेकार कारकर्दगी, बरवक़्त अदम दस्तयाबी और ज़रूरी आलात से महरूमी की शिकायत करते आरहे हैं।

अच्चम पेट असैंबली हलक़ा के उमराबाद, लंगाल में 108 बेकार रिपेर में हैं। मानव पॉड में भी एम्बुलेंस रिपेर में रहने की इतेला है। ज़िला के अवाम का मुतालेबा है के तमाम मंडलों में फी कस कम अज़ कम एक एम्बुलेंस जो तमाम जरूरतों से भरी हो फ़राहम की जाये और बरवक़्त दस्तयाब रहने के इक़दामात किए जाएं।