एर्दोगन ने क्यों कहा- ‘फिर से कायम होगी उस्मानिया सल्तनत’

तुर्की के लिए 24 जून यानी रविवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। तुर्की की जनता रविवार 24 जून को इस देश के राष्ट्रपति और संसद के चुनाव के लिए मतदान करेगी।

तुर्की में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में वर्तमान राष्ट्रपति रेसेप तय्यिप एर्दोगान सहित 6 लोग राष्ट्रपति पद के लिए मैदान में हैं। एर्दोगान यह चुनाव जीतने के लिए कड़ी मेहनत करते नज़र आ आये।

एर्दोगान ने कई बार रैली को सम्बोधित करते हुए कहा की वह फिर से तुर्की में सल्तनत-ए-उस्मानिया कायम करेंगे। चुनाव प्रचार के दौरान एर्दोगान की यह लग्न भी देखी गयी। एर्दोगान ने कहा की 24 को तुर्की में एक बार फिर से ईद मनाई आएगी।

तुर्की के चुनाव आयोग ने एलान किया है कि रविवार के चुनाव में मतदान के लिए देश के पांच करोड़ साठ लाख तीन सौ बाइस लोगों को मताधिकार प्राप्त है। विदेश में रहने वाले तुर्क नागरिकों के लिए सात जून को मतदान आरंभ हुआ था जो चार दिन पहले समाप्त हो चुका है।

तुर्की में कल होने जा रहे चुनाव इस देश के एैतेहासिक चुनाव बताए जा रहे हैं क्योंकि इससे पहले कभी भी इस देश में संसद और राष्ट्रपति के चुनाव एकसाथ नहीं हुए थे। तुर्की के राष्ट्रपति पद के चुनाव यदि दूसरे चरण तक खिंच जाते हैं तो फिर दूसरे चरण के चुनाव 8 जूलाई को कराए जाएंगे।

तुर्की के संविधान में परिवर्तन करने के बाद अब इस देश की शासन व्यवस्था राष्ट्रपति पर आधारित होगी जिसके पास पहले से अधिक अधिकार हो जाएंगे। वहां के संविधान के अनुसार प्रधानमंत्री का पद समाप्त हो जाएगा और सारी शक्ति राष्ट्रपति के हाथों में होगी।

आपको बता दें की एर्दोगान एक ऐसी शख्सियत है जिन्हें इस्लामी देश का लीडर जाता है। वह बेखोफ है और दुश्मनों से लड़ने की ताकत रखते है। तुर्की की आबादी में आधे लोग तुर्क है तो आधे लोग बोस्निया है. जो तुर्की के लंबे समय से अपने सबसे अच्छे दोस्त रहे हैं।

तुर्की-बोस्नियाई दोस्ती के लिए एक संगठन, बोसफोर के चेयरमैन रिज़वान हैलिलोविक, तुर्की और बोस्निया के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को विस्तार से सूचीबद्ध करने के इच्छुक हैं, जो चार शताब्दियों से अधिक समय तक तुर्क साम्राज्य का हिस्सा था। यह विरासत अभी भी पूरे देश में पूर्ण प्रदर्शन पर है।

साभार- vवर्ल्ड न्यूज अरेबीया’