नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज एक इस्लामी तंज़ीम की दरख़ास्त को समात के लिए क़बूल करने से इनकार करदिया जिस में इस्तिदा की गई थी कि मुसलमान लड़कियों को ऑल इंडिया पैरामेडिकल ऐंटरैंस टेस्ट में हिजाब इस्तेमाल करने की इजाज़त दी जाये। ये टेस्ट कल होने वाला है।
चीफ जस्टिस एच एल दत्तू की क़ेदात वाली एक बेंच ने कहा कि अक़ीदा इस से क़तई मुख़्तलिफ़ है कि किस लिहाज़ के कपड़े पहने जाने चाहिऐं। अदालत ने कहा कि ऑल इंडिया पैरामेडिकल ऐंटरैंस टेस्ट दुबारा मुनाक़िद हो रहा है और इस सिलसिले में कुछ वाजिबी तहदेदात की ज़रूरत भी है।
सीनियर वकील संजय है गड्डे ने एस आई ओ की जानिब से अदालत में पेश होते हुए कहा कि सी बी एस ई ने ड्रेस कोड तैयार किया है वो इम्तेहान हाल में दाख़िले के लिए लाज़िमी है और ये क़ाबिल-ए-क़बूल है सिवाए इसके कि लड़कियां सर पर स्कार्फ़ ( हिजाब ) नहीं पहन सकतीं।
एस आई ओ ने ये मफ़ाद-ए-आम्मा की दरख़ास्त दरर की है। दरख़ास्त में कहा गया है कि स्कार्फ़ का इस्तेमाल लाज़िमी मज़हबी अमल है और लड़कियों को इम्तेहान के लिए इसे तर्क करना पड़ेगा। इस बेंच में जस्टिस अरूण मिश्रा और जस्टिस अमित्वा राय भी शामिल थे। अदालत ने कहा कि उसे तातीलात के दौरान इम्तेहान ही को कुलअदम करना पड़ा था क्योंकि इस में बड़े पैमाने पर बे क़ाईदगियों की शिकायत थी।
सी बी एस ई ने कुछ हिदायात जारी की हैं ताकि अब उन्हें मुंसिफ़ाना बनाया जा सके। अदालत ने कहा कि इस तरह के छोटे मसले में वो मुदाख़िलत नहीं करेगी। अदालत के मूड को देखते हुए है गड्डे ने इस दरख़ास्त से दसतबरदारी इख़तियार करने की ख़ाहिश ज़ाहिर की जिस की अदालत ने इजाज़त देदी। केरला हाइकोर्ट ने दो मुस्लिम लड़कियों को इम्तेहान में शिरकत के वक़्त हिजाब इस्तेमाल करने की मशरूत इजाज़त दी थी। अदालत ने सी बी एस ई के ड्रेस कोड में मुदाख़िलत से इनकार करदिया था।