साल 2008 -में राज शेखर रेड्डी गर्वनमैंट ने तलबा को फ़ीस रीइम्ब्रेस्मेंट देने का फ़ैसला किया था जो काबिल-ए-सिताइश है और कई ग़रीब स्टुडेंट्स ने इस से इस्तिफ़ादा किया। मगर पिछले दो सालों से गर्वनमैंट मुख़्तलिफ़ किस्म के बहाने कर रही है जिस की वजह से ये मसला संजीदा बहस का मौज़ू बना हुआ है ।
हाल ही में हुकूमत ने इस मसला को हल करने के लिए एक कमेटी तशकील दी । जिस ने अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए हुकूमत को ये मश्वरा दिया कि फ़ीस रीइम्ब्रेस्मेंट के बजाय 1,000 रुपये फ़ीस स्टुडेंट्स के लिए मुख़तस करदी जाय ।
बक़ीया फ़ीस स्टुडेंट्स या तो अपनी जेब से अदा करे या हुकूमत इस के लिए बैंक लोन का इंतिज़ाम करेगी। रियास्ती हुकूमत का सालाना बजट एक लाख 60 हज़ार करोड़ रुपया है जबकि स्टुडेंट्स की जुमला फ़ीस की रक़म सिर्फ पाँच हज़ार करोड़ रुपए देने के बहाना बाज़ीयां करना बड़े अफ़सोस की बात है ।
स्टूडैंटस इस्लामिक आर्गेनाईज़ेशन आफ़ इंडिया सिटी निज़ाम आबाद की जानिब से नहरू पार्क से लेकर कलक्टर ग्राऊंड तक रिया ली निकाली गई और कलक्टर ऑफ़िस पर धरना मुनज़्ज़म कियागया।
ऐस आई ओ ने हुकूमत से मुतालिबा किया कि समाज के पिछड़े और मआशी(आर्थिक) तौर पर कमज़ोर स्टुडेंट्स जैसे एस सी एसटी और बी सी ई तलबा को तालीम हासिल करने का मौक़ा फ़राहम करते हुए फ़ीस रीइम्ब्रेस्मेंट को जारी रखे। इस मौक़ा पर ज़िला कलक्टर को मैमोरंडम पेश किया गया।