मर युकी माहिरीन ने कहा है कि क़ुव्वत-ए-इरादी से काम लेकर लोग कम खाना खा सकते हैं। यूनीवर्सिटी औफ़ मैनी सोटा कार्लसन स्कूल औफ़ मैनिजमंट के माहिरीन की नई तहक़ीक़ के मुताबिक़ बाअज़ लोगों में क़ुव्वत-ए-इरादी मौजूद होती है, बाअज़ में नहीं होती।
जिन लोगों में क़ुव्वत-ए-इरादी मौजूद होती है उन्हें जब दावत पर बुलाते हैं तो वो फ़ौरी तौर पर इनकार कर देते हैं जिस से वो ग़ैर सेहत मंदाना ग़िज़ा खाने से बच जाते हैं।
इलावा अज़ीं सेहत मंद ग़िज़ा का इस्तेमाल भी वो तनासुब से करते हैं। वो खाने की मिक़दार मद्द-ए-नज़र रख कर खाते हैं जिस की वजह से वो कम खाना खा सकते हैं और मोटापे का शिकार नहीं होते। माहिरीन के मुताबिक़ किसी भी काम में कामयाबी केलिए क़ुव्वत-ए-इरादी बहुत ज़रूरी है। ये कामयाबी की कुंजी है