कांग्रेस का ममता बनर्जी से रब्त

नई दिल्ली, ०९ जनवरी: ( पी टी आई) मग़रिबी बंगाल की चीफ़ मिनिस्टर ममता बनर्जी की कांग्रेस पर तन्क़ीद के एक दिन बाद कांग्रेस ने अपनी हलीफ़ से रब्त पैदा करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस के साथ बेहतर मुवासलात की ज़रूरत बंद दरवाज़ों के अंदर ही महिदूद करना चाहिये।

ममता बनर्जी के कांग्रेस से तर्क ताल्लुक़ात के इमकान की परवाह किए बगै़र कांग्रेस पार्टी के सीनीयर क़ाइद मर्कज़ी वज़ीर सलमान ख़ुरशीद ने कहा कि ममता बनर्जी के ब्यानात का बैन उलसतूर मतलब पढ़ने की कोशिश ज़रूरी नहीं है। कांग्रेस बरसर-ए-इक़तिदार इत्तिहाद से जो मग़रिबी बंगाल में क़ायम है बाहर आने केलिए तैयार है।

उन्हों ने कहा कि ताहम ममता बनर्जी के ब्यानात के बैन उलसतूर कोई मतलब तख़ैयुल की बिना पर अख़ज़ करने की ज़रूरत नहीं है। अगर बाहम इख़तिलाफ़ात हैं तो उन्हें बंद दरवाज़ों के अंदर तबादला-ए-ख़्याल के ज़रीया दूर किया जा सकता है। उन्हों ने कहा कि बाअज़ औक़ात मुम्किन है कि ममता बनर्जी की तवक़्क़ुआत से कांग्रेस के रद्द-ए-अमल हम आहंग ना हों।

मुझे यक़ीन है कि ममता बनर्जी को भी अपने राय दहिंदों से कुछ तवक़्क़ुआत वाबस्ता होंगी। वो मग़रिबी बंगाल में तवील अर्सा के बाद इक़तिदार में तबदीली करके इस का सबूत दे चुके हैं लेकिन कांग्रेस भी एक क़ौमी पार्टी है, हमें भी कई तवक़्क़ुआत हैं जो किसी एक रियासत की हद तक महिदूद नहीं हैं।

सलमान ख़ुरशीद ने कहा कि हम इन अंदेशों को बख़ूबी समझते हैं और मजबूरीयों से भी वाक़िफ़ हैं। दोनों हलीफ़ों के दरमयान एतिमाद की बहाली के लिए बेहतर मुवासलात की ज़रूरत है और दोनों जानिब ऐसी सलाहीयतों का फ़ुक़दान नहीं है जो बेहतर तरसील कर सकें।

उन्हों ने कहाकि वो ममता बनर्जी को तरग़ीब देना नहीं चाहती, उन की किस्म का कोई भी फ़र्द अपने हलक़े में सबको समेट लेना चाहता है।