मुंबई : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के महाराष्ट्र से सांसद गोपाल शेट्टी ने किसानों के ऊपर की गयी टिप्पणी किसानों में आत्महत्या एक फैशन बन गया है पर हुई आलोचनाओं के बाद अपनी इस टिप्पणी के बारे में सफाई देते हुए कहा कि मैंने ये कहा था कि राज्य सरकारों के बीच आत्महत्या करने वाले किसानों को मुआवजा देने के लिए प्रतियोगिता हो रही है |
उत्तर मुंबई से भाजपा सांसद ने कहा है कि उन्होंने ग़लती से शब्द ‘फैशन’ के बजाय ‘प्रतियोगिता’ पहले इस्तेमाल किया |
उन्होंने आईएएनएस को बताया कि पहले कि सरकारों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया इसी वजह से किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है | उन्होंने बताया कि मैंने कहा था कि राज्य सरकारों में इस मुद्दे पर प्रतिस्पर्धा हो रही है लेकिन मैंने प्रतिस्पर्धा की जगह गलती से फैशन इस्तेमाल कर लिया जो मुद्दा बन गया |
मैं कह रहा था कि यदि एक राज्य किसान आत्महत्या करने के लिए पांच लाख मुआवजा देता है तो दूसरा आठ लाख देता है तीसरा नौ लाख देता है इस तरह की प्रतिस्पर्धा नहीं होनी चाहिए | किसानों को पैसा देना समस्या का हल नहीं है बल्कि इस समस्या के हल के लिए कोई योजना बनानी चाहिए |
रिपोर्टों के अनुसार, शेट्टी ने इससे पहले राज्य में किसानों की आत्महत्याओं को फैशन बताकर उनका मज़ाक उड़ाया था | उन्होंने एक प्रमुख टीवी चैनल से कहा था कि सारे किसान भुखमरी और बेरोजगारी के कारण आत्महत्या नहीं कर रहे हैं बल्कि ये एक फैशन बन गया है |
कांग्रेस नेता संजय निरूपम शेट्टी की टिप्पणी की निंदा करते हुए कहा कि इस टिप्पणी से किसानों के प्रति भाजपा की ‘असंवेदनशीलता ” का पता चलता है |
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