प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीजेपी के बड़बोले नेताओं को चुप रहने की नसीहत दिए जाने के बावजूद पार्टी के कुछ नेताओं की ज़ुबान बेलगाम है। ऐसे ही हैं कर्नाटक के बेलगावी (ग्रामीण) से बीजेपी विधायक संजय पाटिल।
पाटिल के खिलाफ हाल में ही एक विवादित बयान पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। इस बयान में उन्होंने कहा था कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव सड़क और पानी के मुद्दे पर नहीं बल्कि हिंदू और मुसलमानों के बीच हो रहा है।
पाटिल ने अब कहा है कि इससे वो मना नहीं कर रहे बयान उन्हीं का है लेकिन जिस संदर्भ में उन्होंने कहा था, उसे वैसे ही पेश नहीं किया गया। यानि पाटिल ने यही कहना चाहा कि उनके बयान को तोड़- मरोड़ कर पेश किया गया है।
पाटिल ने सोमवार को कहा, ‘कोई तो मुसलमान है जो पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाता है। कोई तो मुसलमान है जो क्रिकेट मैच में पाकिस्तान के जीतने पर पटाखे फोड़ता है। कोई तो है जो पाकिस्तान का झंडा हाथ में लेकर घूमता है। हिंदुस्तान में उसे ही तो ढूंढना है।
पाटिल ने विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन भरने से पहले रोड शो के जरिए शक्ति प्रदर्शन किया। साफा पहने उनके समर्थकों ने हाथों में तिरंगे और भगवा झंडे थामे हुए थे। पाटिल खुद रथ पर सवार थे। उन्होंने रथ पर ही ‘आजतक’ संवाददाता से खास बात की।
पाटिल ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा, ‘सिर्फ रोड और सीवर ही विकास नहीं होता, उसके साथ धर्म और संस्कृति की रक्षा करने की जिम्मेदारी भी नेताओं की है।
हिंदू बनाम मुस्लिम (चुनाव) नहीं हो सकता लेकिन अगर कोई मुसलमान हिंदुस्तान के खिलाफ काम करता है तो उसे रोकना हमारा फर्ज है।