हादसे के बाद बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है।राहत कार्य के लिए सेना को नहीं बुलाया गया है, लेकिन हादसा उसके क्षेत्र के बेहद करीब हुआ है।इसलिए आर्मी फील्ड हॉस्पिटल को इलाज के लिए लगा दिया गया है।
कोलकाता में हाल के दिनों में पुल टूटने की यह तीसरी बड़ी घटना है। इससे पहले अप्रैल, 2016 में कोलकाता में ही निर्माणाधीन पुल गिरने से दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो गई जबकि करीब 100 लोग घायल हुए थे।
चश्मदीदों का कहना है कि इस हादसे में बहुत से लोग अभी भी मलबे में दबे हुए हैं। जैसे ही पुल ढहा, उसके साथ ही बहुत तेज आवाज सुनाई दी। यहां तक की आसपास के इलाकों की बिजली भी चली गई।
फिलहाल स्थानीय लोग दमकल विभाग के कर्मचारियों के साथ मिलकर बचावकार्य में जुटे हैं। ये 60 साल पुराना पुल था। इस पुल के नीचे ही रेलवे ट्रैक है।
हादसे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि पूरे मामले की जांच मुख्य सचिव की निगरानी में होगी और अगर जरूरी हुआ तो कई महत्वपूर्ण एक्शन भी लिए जा सकते हैं।
विपक्षी पार्टियों ने तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि ‘पुराने पुलों की मरम्मत के प्रति उसकी लापरवाही’ इस घटना की मुख्य वजह है।
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