क्या अमीरी से हो रहा है दुनिया का नुकसान ?

गरीबी के खातमे के लिए काम करने वाली निजी तंज़ीम ऑक्सफैम का कहना है कि पिछले एक साल में दुनिया भर के 100 सबसे अमीर लोगों ने जितनी दौलत कमाई है उसका एक चौथाई हिस्सा भी दुनिया भर की गरीबी मिटाने के लिए काफी है।

अगले हफ्ते स्विट्जरलैंड में होने वाले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से ठीक पहले इस तंज़ीम ने दुनिया भर के लीडरों से इस असमानता को दूर करने की मांग की है।

तंज़ीम के मुताबिक बैनुल अकवामी इक्तेसादी निज़ाम को इस सुधार पर काम करने की जरूरत है ताकि इंसानियत के लिए कुछ काम किया जा सके।

बुध के दिन से स्विट्जरलैंड के दावोस शहर में दुनिया भर के सयासी लीडरों और इक्तेसादी माहीरीन (Economic experts) की चार दिन की इजलास होने वाली है।

“असमानता की कीमत” नाम से शाय इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दौलत के कॉन्सेंट्रेशन (Concentration) की वजह से ही गरीबी के खातमे के लिए की जाने वाली कोशिशें कामयाब नहीं हो पा रही हैं।

ऑक्सफैम के मुताबिक दुनिया भर की कुल आबादी के महज एक फीसद अमीर लोगों की आमदनी में पिछले बीस सालों में साठ फीसद की बढ़ोतरी हुई है।

रिपोर्ट का कहना है कि एक ओर जहां दुनिया के सौ सबसे अमीर लोगों ने पिछले साल 240 अरब डॉलर की कमाई की वहीं दुनिया भर के बेहद गरीब तबके के लोगों को महज सवा डॉलर में एक दिन गुज़ारना पड़ा।

ऑक्सफैम की चीफ एग्जीक्यूटिव आफीसर बारबरा स्टॉकिंग का कहना है, “हम बहुत दिनों तक खुद को इस भुलावे में नहीं रख सकते कि महज कुछ लोगों के रकम जमा कर लेने से इसका फायदा बहुत लोगों को मिल सकता है।”

उनके मुताबिक सिर्फ एक फीसद लोगों के हाथों में रक़म का कॉन्सेंट्रेशन (Concentration) इक्तेसादी सरगर्मीयो को भी कमजोर करता है और इसका खामियाजा हर शख्स को भुगतना पड़ता है।

तंज़ीम ने इस असमानता (Inequality) को खत्म करने के लिए नई आलमी बहस की अपील की है।

तंज़ीम ने अपनी तरह से इस बारे में कई सुझाव भी दिए हैं जिनमें टैक्स ( Tax) में कई तरह के सुधार करने की सलाह भी शामिल है