कश्मीरी पंडितों की वादी में वापसी के लिए अनक़रीब पॉलीसी इक़दामात: वज़ीरे दिफ़ा
मुसल्लह अफ़्वाज ख़ुसूसी इख़्तेयारात क़ानून की रियासत जम्मू-ओ-कश्मीर से बर्ख़ास्तगी का इन्हिसार रियासती सूरत-ए-हाल में पेशरफ़्त पर होगा। इस के लिए वक़्त दरकार है। वज़ीरे दिफ़ा अरूण जेटली ने कहा कि जहां तक आज की सूरत-ए-हाल का ताल्लुक़ है, हमारी मुसल्लह अफ़्वाज और मुक़ामी सयान्ती अफ़्वाज सूरत-ए-हाल से निमट रही है।
वक़्त गुज़रने के साथ साथ हमें सूरत-ए-हाल की पेशरफ़्त का जायज़ा लेना होगा। वो अपने दो रोज़ा दौरा-ए-जम्मू-ओ-कश्मीर के इख़्तेताम पर प्रेस कान्फ्रेंस से ख़िताब कररहे थे। उन्होंने एक सवाल का जवाब देते हुए कि क्या मर्कज़ जम्मू-ओ-कश्मीर से सयान्ती सूरत-ए-हाल में बेहतरी के पेशे नज़र फ़ौज के ख़ुसूसी इख़्तेयारात क़ानून की तंसीख़ पर ग़ौर कररहा है? मज़कूरा बाला वज़ाहत की।
एक और सवाल का जवाब देते हुए वज़ीर दिफ़ा ने कहा कि मुसल्लह अफ़्वाज की इंसानी हुक़ूक़ की ख़िलाफ़वरज़ी पर उनके ख़िलाफ़ मुक़द्दमा चिली की इजाज़त हक़ायक़ का जायज़ा लेने के बाद ही दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि अगर शिकायत बे बुनियाद हो तो मुक़द्दमा दायर करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।
उन्होंने कहा कि उसे वाक़ियात का मुख़्तलिफ़ नुक़्ता-ए-नज़र से जायज़ा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मर्कज़ आइन्दा चंद दिन में कश्मीरी पंडितों की वादी में वापसी के लिए पॉलीसी इक़दामात का अनक़रीब ऐलान करेगा। चीफ मिनिस्टर जम्मू-ओ-कश्मीर उमर अबदुल्लाह ने कल अरूण जेटली से मुलाक़ात की थी और उनके साथ रियासत की सयान्ती सूरत-ए-हाल का जायज़ा लिया था।
उन्होंने कहा कि उन्हें ख़ुशी है कि अरूण जेटली रियासत की सूरत-ए-हाल और उसको दरपेश चिया लुंजों के बारे में तफ़सीलात से वाक़िफ़ होकर नई दिल्ली वापिस होरहे हैं। अरूण जेटली जम्मू-ओ-कश्मीर के दो रोज़ा दौरा पर कल श्रीनगर पहुंचे थे। इनका कोई सियासी एजंडा नहीं था।
वो सिर्फ़ रियासत की सयान्ती सूरत-ए-हाल का जायज़ा लेना चाहते थे। चीफ मिनिस्टर से तबादला-ए-ख़्याल के बाद प्रेस कान्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि तबादला-ए-ख़्याल और रियासत की बेहतर सूरत-ए-हाल के बारे में वो काफ़ी पुरामेद हैं और सय्याहों की कसीर तादाद में आमद का यक़ीन रखते हैं।