चाइल्ड ट्रैफिकिंग: बिहार के हज़ारों बच्चे कहां गुम हो जाते हैं!

पटना 19 जुलाई : बिहार मुल्क के गरीब और पसमांदा रियासतों में एक है। इसी का नतीजा है कि यहां चाइल्ड ट्रैफिकिंग का मसला भयानक हो चुकी है। हर साल न जाने कितने बच्चे अपने घरों से हज़ारों मील दूर भगा ले जाए जाते हैं। कई लड़कियां हरियाणा और राजस्थान जैसे रियासतों में दुल्हनों के तौर में बेच दी जाती हैं तो कई दिल्ली और मुंबई के तवायफ खानों में पहुंचा दी जाती हैं।

लड़के घरेलू नौकरों और मज़दूरों के तौर में काम करने को मजबूर किए जाते हैं। 14 साल का रोशन ऐसा ही एक लड़का है, जिसे हरियाणा में बेच दिया गया। वहां उससे सख्त मेहनत कराई जाती थी। बाद में ‘सेव द चिल्ड्रेन’ नाम की तंजीम ने उसे वापस उसके गांव पहुंचाया। दिल्ली पुलिस के साबिक़ कमिश्नर आमोद कंठ का कहना है कि बिहार में चाइल्ड ट्रैफिकिंग सबसे ज्यादा है। हर साल 35000 से 40000 बच्चे रियासत से गुम हो जाते हैं और कोई नहीं जान पाता कि वो कहां चले गए। जिन खानदानों के बच्चे गुम होते हैं, वो इतने कमजोर तबके के हैं कि पुलिस के पास तक जाने से डरते हैं और अगर चले भी गए तो पुलिस उनकी एक भी नहीं सुनती।

ऐसे दलालों की कोई कमी नहीं जो गरीब लोगों को यह कह कर कि उनके बच्चों को बड़े शहरों में काम पर लगवा देंगे, कुछ रुपये पेशगी देकर ले जाते हैं। फिर वे कहां जाते हैं, क्या करते हैं, इसका कुछ पता नहीं चल पाता। वो गायब ही हो जाते हैं।