जानिये कैसे देश के सैकड़ों लोगों का धंधा बन चुका है गौ-रक्षा

गुजरात: देश की राजनीति में गाय को लेकर जिस तरह का उबाल आज देखने को मिल रहा है उसका फायदा सिर्फ राजनितिक दलों को हो रहा है ऐसा बिलकुल भी नहीं है।

आज तक देश का हर शख्श कम से कम एक बार यह सोचने को मजबूर तो हुआ ही होगा कि गाय को लेकर हिंसा करने वाले कथित गौ रक्षकों को कौन सी बात इतना हिंसक बना देती है कि वो किसी की पिटाई करने या जान लेने तक से भी परहेज नहीं करते?

अगर आपके मन में भी यह सवाल कभी उठा हो तो साहब इस गौ सेवा के पीछे का असल सच जान लेना आपके लिए किसी पहेली को बुझाने से कम न होगा। दरअसल देश में गौसेवा दरअसल सेवा नहीं बल्कि धंदा बनकर लोगों का पेट पाल रही है जिसकी वजह से लोग खूब ज़ोर शोर से गौसेवा में लगे हुए हैं।

हाल ही में एक रिपोर्ट के सामने आने से इस बात का खुलासा हुआ है कि गौ रक्षकों को गौ और बीफ तस्करी के हर मामले ने जब्त किये गए गौधन और बीफ की मात्रा के मुताबिक इनाम दिया जाता है। यह इनाम न सिर्फ पैसों के तौर पर बल्कि सोने, ज़मीन, गाड़ी और यहाँ तक कि मोबाईल के रूप में भी दिया जाता है। इसके इलावा गौरक्षकों में जो लोग सबसे ज्यादा गौधन या बीफ पकड़वाते हैं उन्हें गौ रक्षा समितियों की तरफ से समागम रख सम्मानित भी किया जाता है।

रिपोर्ट में खुलासा यह भी हुआ है कि गौ धन या बीफ की गुप्तसूचना इन गौरक्षकों तक पहुंचाने वालों में हिंदुओं के साथ-साथ मुस्लिम भी शामिल हैं जिन्हें इस काम के एवेज में 3 से 10 हजार/ जानकारी दिए जाते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सूचना देने वाले कई बार खुद कसाई ही होते हैं जो अपने धंधे में बतौर कॉम्पेटिटर काम कर रहे और कसाइयों माल की सूचना इन गौरक्षकों तक पहुंचाते हैं।

गौ रक्षा का यह धंधा गुजरात में पूरी तरह फल फूल रहा है और ज़्यादातर गौरक्षकों की अपनी गौशालाएं हैं जहाँ दूध की बिक्री और गौशाला के नाम पर चंदा लेने का काम धड़ल्ले से किया जा रहा है।