जामिआ उस्मानिया में उर्दू ज़बान से बदतरीन तासब

हीदराबाद 08 फ़बरोरी: तेलंगाना 1969 तहरीक के जहद कारों ने उर्दू को किसी एक क़ौम की ज़बान समझ कर उर्दू के साथ जारी खिलवाड़ की सख़्त अलफ़ाज़ में मुज़म्मत करते हुए उर्दू को ख़ालिस हिन्दुस्तानी ज़बान क़रार दिया। डाक्टर चिरंजीवी कैप्टन पांडव रनगार यडी सिरीधर धर्मा सनम और दीगर ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अपने ख़्यालात का इज़हार करते हुए मुत्तहदा रियासत आंध्र प्रदेश के क़ियाम के बाद उर्दू ज़बान के साथ की गई ज़्यादतियों को काबिल-ए-अफ़सोस क़रार देते हुए कहा कि उर्दू हिन्दुस्तान की ज़बान है जिसको एक क़ौम के साथ जोड़ कर मुसलसिल खिलवाड़ की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि उसमानिया यूनीवर्सिटी में तीन साल बाद कनोकेशन तक़रीब मुनाक़िद की गई और वो तक़रीब भी तेलंगाना तहरीक में नौजवानों की क़ुर्बानीयों और तेलंगाना रियासत की तशकील में ताख़ीर के सबब मानिंद पड़ गई । कैप्टन पांडव रंगा रेड्डी ने तीन साला मशक़्क़त के ज़रीये तारीख़ पर पी एचडी किया था मगर उन्हों ने कनोकेशन तक़रीब का बाईकॉट करते हुए डिग्री हासिल करने से भी इनकार कर दिया जिस के सबब डिग्री पर शाय किए जाने वाले उस्मानिया यूनीवर्सिटी के इमतियाज़ी निशान को तबदील करदेना था।

उन्हों ने कहा कि क़ुतुब शाही और आसिफ़ जाहि दौर‍ए‍ हुकूमत से आंध्रई सरमायादार हुकमरान आर्या समाजियों और आंध्रई कमीयूनिसटों को बेइंतिहा बुग़ज़ है और यही वजहा है कि आंध्रई हुकमरान आसिफ़ जाहि दौर की तमाम तारीख़ी निशानीयों को मिटाने की कोशिश कररहे हैं उन्होंने एसी कोशिशों की सख़्त अलफ़ाज़ में मुज़म्मत करते हुए कहा कि आसिफ़ जाहि दौर की निशानीयां हमारा क़ीमती असासा हैं जिस के तहफ़्फ़ुज़ के लिए हम हर मुम्किन जद्द-ओ-जहद करेंगे।

उन्होंने कहा कि उस्मानिया यूनीवर्सिटी के इमतियाज़ी निशान में उर्दू तहरीर के बजाय संस्कृत के अलफ़ाज़ शामिल करदिए गए हैं जो काबिल-ए-अफ़सोस अमल है उन्हों ने कहा कि आंध्रई हुकमरानों का उर्दू -ओ-ज़बान और आसफ़िया यादगारों के साथ मुतासबाना रवैया कोई नई बात नहीं है उन्हों ने कहा कि उर्दू ज़बान को ख़त्म करने की साज़िश के तहत हिन्दी को उस्मानिया यूनीवर्सिटी में शामिल किया गया जबके मदारिस और आंध्र यूनीवर्सिटी में हिन्दी मौजूद नहीं है उन्हों ने कहा कि क़ुतुब शाही दौर में फ़ारसी का चलन था मगर जब आसफ़िया दौर‍ए‍हुकूमत के आग़ाज़ के बाद महबूब अली पाशाह के दौर हुक्मरानी में फ़ारसी को बैरूनी और उर्दू को हिन्दुस्तानी ज़बान क़रार देकर उर्दू के चलन को आम कर दिया गया था जिस का सिलसिला मुत्तहदा रियासत आंध्र प्रदेश के क़ियाम तक जारी रहा मगर बाद में आंध्रई हुकमरानों और सरमाए दारों ने साज़िश के तहत उर्दू ज़बान के साथ ज़बरदस्त खिलवाड़ किया है।

कैप्टन पांडव रंग रेड्डी ने इस मौके पर कहा कि उर्दू इलाक़ा तेलंगाना की पहचान है उन्होंने मज़ीद कहा कि उर्दू के मद्द-ए-मुक़ाबिल दीगर ज़बानों के फ़रोग़ को तर्जीह देते हुए उर्दू ज़बान को पस्ती का शिकार बनादिया गया है उन्होंने उर्दू को दूसरी सरकारी ज़बान का दर्जा तमाम सरकारी महिकमों में उर्दू ज़बान के चलन को आम करना जनरल अरडरस भी तेलुगुके साथ उर्दू में शाय करना तेलुगु इंग्लिश के साथ तमाम महिकमों में उर्दू -ओ-बोर्डस की तंसीब का मुतालिबा करते हुए उन्होंने कहा कि उर्दू को किसी एक मज़हब से जोड़ कर उर्दू के साथ जारी खिलवाड़ को हम हरगिज़ बर्दाश्त नहीं करेंगे।