झारखंड में एनआरआई का कत्ल

भारतीय मूल के जर्मन नागरिक डॉक्टर बिनय सिंह की बुध रात मुजरिमों ने बोकारो में कत्ल कर दी। पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें एक खातून भी शामिल है और उनसे पूछताछ की जा रही है। डॉक्टर सिंह की बीवी और दो बच्चे म्यूनिख में रहते हैं। उन्हें जर्मन सिफ़ारत खाने के जरिये से इस वाकिया की इत्तिला दी गई है। बोकारो की एसपी अन्नेपु विजयलक्षमी ने बताया कि उनके अहले खाना म्यूनिख से रवाना हो चुके हैं।
एनआरआई के भाई विपिन कुमार सिंह उनका लाश लेकर रांची आ गए हैं, उनकी उम्र 70 साल की थी।
डॉक्टर सिंह आशा विहार नामी एक गैर सरकारी अदारा से जुड़े हुए थे।

वह इस अदारे की तरफ से चल रहे जोहार अस्पताल आशा विहार के प्रोजेक्ट मैनेजर थे। इस अस्पताल की क़याम जर्मन खातून क्लाउडिया जेसेल ने 1995 में की थी। इलाके के लोग क्लाउडिया को कल्याणी दीदी पुकारते हैं। पुलिस एसपी विजयलक्ष्मी ने बीबीसी को बताया ,” बुध को डॉ बिनय सिंह तीन और लोगों के साथ रांची गए थे। बोकारो लौटने के बाद सिंह जैनामोड़ पर कार से उतर गए। वहां से बाइक से जोहार अस्पताल जाने के दौरान छह नकाबपोश मुजरिमों ने उनपर लाठी डंडों से हमला कर दिया। इससे मौके पर ही उनकी मौत हो गयी। ”
एसपी विजयलक्ष्मी का कहना है कि कत्ल अस्पताल कमेटी के दुबारा तशकील को लेकर की गई है और कत्ल के मुजरिम पहले अस्पताल कमेटी में अहम ओहदे पर थे। विजयलक्ष्मी के मुताबिक डॉक्टर सिंह ने गड़बड़ी पकड़ने के बाद उन्हें इस काम से अलग कर दिया था।

डॉ बिनय सिंह बिहार के छपरा के लोहाटोला के रहने वाले शत्रुघ्न सिंह के बेटे थे। साल 1996 में वह जर्मनी चले गए। उन्होंने जर्मन खातून से शादी कर ली थी इसके बाद वहां की नागरिकता लेकर वह म्यूनिख़ में रहने लगे थे। साल 2004 में वह रांची लौटे और 2010 में आशा विहार से जुड़ गए। वे गैर सरकारी अदारा की तरफ से चल रहे अस्पताल में फ्री में सर्विस दे रहे थे।