हैदराबाद । २० । मार्च : ( रास्त ) : तक़दीर पर ईमान इस्लाम का लाज़िमी जुज़ है हर मुस्लमान को इस बात पर यक़ीन है कि इंसान के पैदा किए जाने से पहले ही विलादत से मौत तक पेश आने वाली हर अच्छी और बुरी चीज़ ख़ुदा के हुक्म से लिख दी जाती है । जिस को तक़दीर कहा जाता है ।
अगर इंसान ख़ुदा के तक़दीर पर दिल से ईमान ले आए तो तमाम परेशानियां यकलख़त ख़तन होजाएंगी । इन ख़्यालात का इज़हार मुमताज़ आलम दीन मौलाना मुफ़्ती शाह अबदुल्लाह फोलपोरी ने दार-उल-उलूम सबील अस्सलाम में ख़िताबकरते हुए किया । उन्हों ने कहा कि तक़दीर अटल हक़ीक़त है दुनिया की कोई ताक़त ख़ुदा की लिखी हुई तक़दीर को टाल नहीं सकती और ना इस के नफ़ाज़ को कोई रोक सकता है ।तक़दीर जैसी भी हो इस पर दिल से यक़ीन रखते हुए इख़तियारी आमाल को हमें दरुस्त करने का मुकल्लिफ़ बनाया गया है ।
उन्हों ने ये भी कहा कि अगरचे हमारी अक़ल औरनाक़िस फ़हम किसी चीज़ का इदराक ना करसकें फिर भी मुस्लमानों को यक़ीन रखना चाहीए कि अल्लाह की तरफ़ से जो भी फ़ैसले होते हैं वो मबनी बरहकमत हैं तक़दीर रहमत है ज़हमत नहीं । अगर कोई चीज़ मंशा-ए-के ख़िलाफ़ वाक़्य हो तो इस में अपनीबदआमाली का दख़ल है । ऐसे वक़्त इंसान को अपने आमाल का मुहासिबा करना चाहीए और अमल को सही रुख पर लगाना चाहिए । उन्हों ने कहा कि ख़ुदा ने अपने इलम-ए-ग़ैबके मुताबिक़ बंदों के नामा आमाल पर पेशगी हकीमाना फ़ैसले सादर फ़र्मा दिये।
दुनियावी सारे निज़ाम का ताल्लुक़ तकवीन ख़ुदावंदी से है जिस के हक़ायक़ इंसानी फ़हम-ओ-बाला-ओ-बरतर हैं । क़ारी मंसूर अहमद ग़फ़रानी की तिलावत से जलसा का आग़ाज़ हुआ। मौलाना मुहम्मद नोमान बदर अलक़ा सिमी नदवी ने मेहमानान किराम का ख़ौरमक़दम किया । आख़िर में मौलाना मुफ़्ती अबदुल्लाह फोलपोरी ने दुआ की ।।
आक़ाए नामदार फ़रमाते हैं जो बंदा नवाफ़िल की कसरत से अल्लाह का क़ुरब हासिल करता है अल्लाह इस के हाथ इस के पैर उस की ज़बान बन जाता है । शायर जनाब साबिर अचलपोरी की सदारत में मुशायरा हुआ । मुशायरा में साबिर अचलपोरी ( झारखंड ) सादिक़ नवेद , पैर इफ़तिख़ारी सुख़न चिशती मुहम्मद अबदुल क़दीर कादरी मौलाना नादिर अलमसदोसी डाक्टर राही , अनीस अहमद अनीस , अहमद क़ासिमी शाह नवाज़ हाश्मी ने अपने कलाम से समाव बांध दिया । डाक्टर राही ने मुज़ाकरे की और जनाब नादिर अलमसदोसी ने मुशायरे की निज़ामत के फ़राइज़ अंजाम दीए और शुक्रिया अदा किया ।