बैंकों को हिदायत दी गई है कि तालीमी क़र्ज़ के लिए दरख़ास्तें मुस्तरद करने की वजूहात बताई जाएं। हुकूमत ने पार्लीमैंट में ये बात बताई। वज़ीर फ़ाइनान्स पी चिदम़्बरम ने राज्य सभा को तहरीरी जवाब में बताया कि बैंकों को ये मश्वरा दिया गया है कि तालीमी क़र्ज़ की दरख़ास्तें मुताल्लिक़ा ब्रांच की कंट्रोलिंग अथॉरीटी की मंज़ूरी के ताबे होनी चाहीए।
अगर किसी की दरख़ास्त मुस्तरद की जाती है तो दरख़ास्त गुज़ार को तहरीरी तौर पर उस की वजह बतानी होगी। उन्होंने कहा कि इंडियन बैंक एसोसीएष्ण को ये मश्वरा दिया गया है के वो तालीमी क़र्ज़ के ताल्लुक़ से शिकायात के अज़ाला के मेकानिज़म की मॶसर तशहीर करें और अवाम को इस मेकेनिज़म से मवसर तौर पर इस्तिफ़ादा का मश्वरा दें।
उन्होंने कहा कि तालीमी क़र्ज़ के ताल्लुक़ से जब भी शिकायात मौसूल हो, हम मुताल्लिक़ा बैंकों के साथ मामले की जाँच कररहे हैं। रिज़र्व बैंक ने भी हाल ही में इस ताल्लुक़ से रहनुमाया ना हिदायात जारी की हैं।