तीसरे मरहले का वोटिंग कल होना है जिसमें रांची और आसपास के 17 सीटों से ही इक्तिदार तय होना है। दारूहुकूमत रांची एसेम्बली हल्के में बीजेपी उम्मीदवार सीपी सिंह को हराना तमाम पार्टियों के लिए चैलेंज है। मालूम हो की 1996 से मुसलसल सीपी सिंह रांची एसेम्बली हल्के से जीतते आए हैं। इस बार 5 वीं बार सीपी सिंह बीजेपी की टिकर पर इंतिखार लड़ रहे हैं।
बदलाव और मुक़ामी पॉलिसी के नाम पर जेएमएम बीजेपी को कांटे की टक्कर दे रहे हैं। जेएमएम उम्मीदवार महुआ मांझी अपनी जगह बनाने के लिए धुआँधार इश्तिहार का सहारा लिए हैं। शहरी वोटर में अपनी जगह बनने के लिए इस बार जेएमएम दाव चला है। आदिवासी वोटरों के साथ साथ कई तबके के वोट मिलने की उम्मीद है इनको। पार्टियां अक़लियत वोटों में सेंधमारी में लगे हैं। जिसकी वजह से मुस्लिम अक़लियत वोट में बिखराव है।
बीजेपी के उम्मीदवार सीपी सिंह को मोदी लहर में यकीन है और उसी के सहारे इंतिखार जीतने की उम्मीद लगी है। वैसे 20 सालों से रांची एसेम्बली सीट जीतने के बावजूद कुछ खास तरक़्क़ी नहीं दिखती फिर भी मोदी लहर की वजह से नैया पार लगाने की जुगात में हैं। इधर कुछ मुस्लिम उम्मदीवार भी मुस्लिम वोटरों को मुत्तहिद में लगे हैं पर रिवायाती मुस्लिम वोटर की ज़ेहनीयत मुत्तहिद नहीं हैं जिसकी वजह से मुस्लिम उम्मीदवार को कुछ हाथ लगने की उम्मीद नहीं है। जातिये फॉर्मूला में अक़लियत वोट तमाम पार्टियों के लिए मुफीद है अगर फोर्मूले को देखा जाये तो 20 फीसद अक़लियत वोट जीत के लिए अहम हैं अगर ये 20 फीसद वोट किसी उम्मीदवार को मिल जाए तो बाक़ी जीत के लिए दीगर वोट काफी है। और तब बीजेपी को कोई टक्कर दे सकता है चूंकि बीजेपी के पास तकरीबन 50 फीसद वोट रिवायती हैं जिनमें तमाम पार्टियां शामिल हैं। आदिवासी, क्रिश्चन और अक़लियत वोट में ही पार्टियां सेंधमारी करते हैं। जीत का ड्राफ्ट यहीं से तय होता है।