तेलंगाना रियासत में उर्दू के साथ इन्साफ़ की उमीद

मुल्क की तक़सीम के बाद उर्दू पाकिस्तान की क़ौमी ज़बान मुक़र्रर की गई बावजूद इस के वहां पर इलाक़ाई ज़बानों का ग़लबा है मगर हिंदुस्तान में लाख साज़िशों के बावजूद उर्दू ज़बान की तरक़्क़ी वो तहफ़्फुज़ का सिलसिला आज भी जारी है।

अंजनी कुमार के शायरी मजमूआ गुलिस्ताँ गोयल वो मुमताज़ गुलूकार मुहम्मद वकील और प्रवाग्रव की के दिल की नज़र से सी डी की रस्म इजराई तक़रीब से सदारती ख़िताब के दौरान जनाब ज़ाहिद अली ख़ान मुदीर आला रोज़नामा सियासत ने इन ख़्यालात का इज़हार किया।

सिलसिला ख़िताब को जारी रखते हुए जनाब ज़ाहिद अली ख़ान ने कहा कि उर्दू ज़बान की तरक़्क़ी के लिए जद्दो जहद करने वालों में राज बहादुर गौड़ महेंद्र और लाहोटी जैसे नाम शामिल हैं वहीं पर उर्दू ज़बान को ज़िंदा रखने में हिंदू भाईयों की गिरांक़द्र ख़िदमात को उर्दू दां तबक़ा कभी फ़रामोश नहीं कर सकेगा।

उन्हों ने कहा कि तकसीम हिंद के बाद से उर्दू की हिफ़ाज़त के लिए जद्दो जहद करने वालों में हिंदू मुस्लिम सिख और ईसाई तमाम मज़ाहिब के लोग शामिल हैं जो उर्दू की तरक़्क़ी को अपनी ज़िंदगी का मक़सद हयात बनाए हुए हैं।

जनाब ज़ाहिद अली ख़ान ने अंजनी कुमार गोयल के शायरी मजमूआ जो उर्दू और हिन्दी में शाय किया गया है को उर्दू हिन्दी इत्तिहाद में एक अज़ीम कारनामा क़रार देते हुए कहा कि इदारा सियासत की जानिब से एक ऐसा सॉफ्टवेर तैयार किया गया है जो उर्दू में टाइप करने पर हिन्दी स्क्रिप्ट में तबदील हो जाता है और सियासत की वेब साईट पर मज़कूरा सॉफ्टवेर का इस्तेमाल भी हो रहा है और काबिले फ़ख़र ये बात है कि सियासत डॉट कॉम के 16 लाख मुशाहिदीन में एक लाख से ज़्यादा नॉर्थ इंडिया के वो लोग हैं जो सियासत डॉट कॉम की हिन्दी ख़बरें मुलाहिज़ा हैं।