फरुखाबाद, 09 फ़रवरी: ( एजेंसी) क्या हर छोटी मोटी तकलीफ़ या जिस्मानी परेशानी पर गोलीयां और कैप्सूल खाना मुनासिब है ? अक्सर ये सवाल आजकल के बुज़ुर्ग नौजवान नसल से करते नज़र आते हैं जो मामूली तकलीफ़ बर्दाश्त करने के भी मुतहम्मिल नहीं होते।
जी हाँ! एक ज़माना था जब मामूली पीठ का दर्द पेट का दर्द, सर का दर्द और दाँत का दर्द अगर होता तो घरेलू नुस्खे़ इस्तेमाल करते हुए इनका बरवक़्त ईलाज कर लिया जाता था लेकिन भला हो मेडीकल साईंस का जिसने घरेलू नुस्ख़ों को पसेपुश्त डाल दिया ।
इन कॉलम्स में मेडीकल साईंस पर तन्क़ीद नहीं की जा रही है बल्कि उन आदतों को तन्क़ीद का निशाना बनाया जा रहा है जिस के तहत मामूली मामूली परेशानीयों का ईलाज भी गोलीयों और कैप्सूल्स में तलाश किया जाता है ।
सबसे पहले तो इन हालात का जायज़ा लिया जाये जिसके तहत आप मुतास्सिर हुए हैं । अगर इन हालात को क़ाबू में कर लिया जाये तो आप मुश्किलात से दूर रहेंगे । अलबत्ता दाँत के दर्द के लिए आज भी लौंग के तेल को अकसीर समझा जाता है । इलावा अज़ीं कई मंजन भी हैं । आधे सर के दर्द के लिए साईंसदानों ने एक स्टार ट्रैक बैंड भी ईजाद किया है जिसे फ़ी यौम सिर्फ़ बीस मिनटों के लिए सिर पर बांधने की ज़रूरत है ।
इस बैंड या आले का नाम Cefaly है । तहकीक़न के मुताबिक़ जिन लोगों ने इस बैंड का इस्तेमाल किया उन के आधे सर के दर्द में एक तिहाई कमी जरूर हुए और ऐसे अफ़राद जिन के सिरदर्द में निस्फ़ कमी हुई उन की तादाद तीन गुना बढ़ गई । ये बात बेल्जियम की लीज यूनीवर्सिटी प्रोफ़ैसर जैन शोइनीन ने बताई ।