गुजरात: 15 अगस्त को गुजरात के उना में दलितों ने मांग की थी कि मरे हुए पशुओं की खाल निकालने का काम करने वाले दलितों को अगर एक महीने के अंदर पांच-पांच एकड़ ज़मीन नहीं दी गई तो देश भर के दलित ‘रेल रोको’ आंदोलन किया जाएगा। इस मामले में गुजरात सरकार हमेशा यही दावा करती आ रही है कि कई सालों से जिन दलितों के पास जमीन नहीं हैं, सरकार उनको ज़मीन मुहैया करा रही है। जबकि सरकार द्धारा दी गई जमीनों के मालिकाना दस्तावेज होने के बाद भी सालों से इन जमीनों पर गांव के बदमाशों ने कब्ज़ा कर रखा है यानी दलितों को सिर्फ़ कागज मिले, ज़मीन नहीं।
गुजरात के युवा दलित नेता जिग्नेश मेवाणी बताते है कि सरकार के दावे के मुताबिक़ जिन दलितों को ज़मीन दी गई है, उनसे बात करने पर पता चला कि सरकार ने बेशक उन्हें जमीन दी है लेकिन असल में तो ज़मीन पर गांव के ऊँची जाति के ज़मींदारों या बादमाशों का कब्ज़ा है। गांव वालों का कहना है कि हमने इस बारे में सरकार को बार-बार बताया लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला।