AAP की हुकूमत होने के बावजूद मुल्क की दारुल हुकूमत दिल्ली में 55 हजार 955 लोग ऐसे हैं जिनके पास रहने को घर नहीं है और वे सड़कों पर ही अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं |
इस मामले में एक इदारा सामाजी सुविधा संगम कि तरफ से तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया था कि दारुल हुकूमत में 55 हजार से ज्यादा लोग खुले आसमान के नीचे रात बिताते हैं और सिर्फ 14 हजार बेघर लोगों को ही रैन बसेरों की सहूलियात मिल सकी है |
ये 14 हजार लोग अब तक बनाए 174 रैन बसेरों में रात बिताते हैं इसमें भी हमेशा यही शिकायत आती है कि रैन बसेरों में बुनियादी सहूलियात की कमी है और गंदे कंबल,बिस्तर पर किसी तरह से लोग रात गुजारते हैं |
दिल्ली अर्बन शेल्टर इंप्रूवमेंट बोर्ड (डीयूएसआईबी) के सीईओ की तरफ से दायर हलफनामे में कहा गया कि उन्होंने खुद दारुल हुकुमत में बेघर लोगों के लिए बनाए गए रैन बसेरों का मुआइना किया है मुआइना के दौरान किसी भी रैन बसेरे में बुनियादी सहूलियात की कमी नहीं पायी गयी |
पिछली हुकूमत ने दावा किया था कि रैन बसेरों की तादाद जल्द ही 190 हो जाएगी लेकिन फिलहाल अभी आप पार्टी की हुकुमत की तरफ से तकरीबन बीस बसों को अराज़ी तौर पर रैन बसेरे बना कर बेघरों को रात बिताने की सहूलियात दी गयी है |