नई दिल्ली, 09 फरवरी: संसद हमले के मुजरिम अफजल गुरु को आज सुबह साढ़े सात बजे फांसी दे गई। सदर जम्हूरिया के तरफ से अफजल गुरु की रहम की दरखास्त खारिज करने के बाद तिहाड़ जेल में उसे फांसी पर लटकाया गया। होम सेक्रेटरी आर के सिंह ने इसकी तसदीक कर दी है।
मरकज़ी वज़ीर ए दाखिला सुशील कुमार शिंदे ने बताया है कि डॉक्टरों ने सुबह आठ बजे अफजल को मुर्दा ऐलान कर दिया।
वहीं, होम सेक्रेटरी आर के सिंह ने बताया कि सदर जम्हूरिया प्रणब मुखर्जी ने तीन फरवरी को अफजल की दर्खास्त को नामंजूर कर दिया था। इसके बाद वज़रत ए दाखिला ने कानूनी कार्यवायी के आखिरी मरहले को पूरा करने की कार्यवाही शुरु की। फांसी दिए जाने की इत्तेला अफजल गुरु के घरवालों को दे दी गई थी।
जम्मू-कश्मीर इंतेज़ामिया ने केबल टीवी, मोबाइल और इंटरनेट खिदमात को पूरी तरह से बंद कर दिया है। साथ ही जम्मू-कश्मीर इंतेज़ामिया ने आज सुबह श्रीनगर समेत वादी के मुख्तलिफ इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया है। मिली इत्तेला के मुताबिक किसी को भी घर से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। अफजल को फांसी दिए जाने से इंतेज़ामिया को कश्मीर में हालात बिगडऩे का अंदेशा है।
हालात को काबू में रखने के लिए ही एहतियातन कर्फ्यू लगाया गया है। पाकिस्तान से लगे सरहदी इलाकों की सेक्युरिटी कड़ी कर दी गई है।
दिल्ली में भी हाई अलर्ट ऐलान कर दिया गया है।
अफजल को तिहाड़ के जेल नंबर तीन में फांसी दी गई। फांसी देने की कार्यवाही इतनी खुफिया थी कि जेल की सेक्युरिटी में तैनात सेक्युरिटी अहलकारों को भी इसकी भनक तक नहीं लगी। ज़राए के मुताबिक, अफजल की लाश को तिहाड़ जेल के अंदर ही दफनाए जाने पर गौर किया जा रहा है।
बीजेपी ने हुकूमत के इस कदम पर खुशी ज़ाहिर की है। बीजेपी के लीडर मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि देर से लिया गया यह फैसला मुल्क के लिए बेहतर है। अफजल गुरु हिंदुस्तानी जम्हूरियत के मंदिर पर हमला करने का मुजरिम था, पूरा मुल्क चाहता था कि अफजल को फांसी दी जाए।
13 दिसंबर 2001 को संसद पर हमले का मास्टरमाइंड अफजल गुरु पिछले 11 साल से तिहाड़ जेल के एक इंतिहाई महफूज़ सेल में बंद था।