हैदराबाद: हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्कॉलर रोहित वेमुला की आत्महत्या के मामले में एचआरडी मंत्रालय द्धारा बनाए गए एक सदस्यीय न्यायिक आयोग की जांच रिपोर्ट ने दावा किया है कि रोहित अपनी आत्महत्या के लिए खुद जिम्मेदार थे।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एके रूपनवाल ने अपनी 41 पन्नों की रिपोर्ट में कहा है कि रोहित ने भेदभाव किए जाने के चलते आत्महत्या नहीं की बल्कि उसके पीछे का कारण उसकी निजी हताशा थी। यूनिवर्सिटी के हॉस्टल से रोहित को निकाला जाना “सबसे लॉजिकल” फैसला था जो यूनिवर्सिटी ले सकती थी।
इसके साथ ही रिपोर्ट में कहा गया है कि रोहित की मां ने आरक्षण का लाभ लेने के लिए खुद को दलित बताया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी और केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने केवल अपना दायित्व निभाया और हैदराबाद यूनिवर्सिटी प्रशासन पर कोई दबाव नहीं डाला गया था।
रूपनवाल ने अपनी जांच रिपोर्ट अगस्त में जमा कर दी थी। रिपोर्ट के अनुसार रोहित का आत्महत्या करने का निर्णय खुद का था और उन्हें यूनिवर्सिटी प्रशासन या सरकार ने इसके लिए मजबूर नहीं किया था।