पटना धमाका : नौशाद ने की खुदकशी की कोशिश : कहा अब न समाज का रहा, न खानदान का

पटना सीरियल धमाके मामले के मुश्तबा इम्तियाज के दोस्त धुर्वा सीठियो के रहने वाले नौशाद आलम ने एनआइए की तरफ से पूछताछ के बाद इतवार को खुदकशी की कोशिश की थी। बताया जाता है कि उसने यह कदम समाज का उसके बदलता नजरिया और खानदान की वजह से उठाया। फिलहाल उसे रिम्स के न्यूरो सजर्री वार्ड में भरती है। उसकी हालत खतरे के बाहर है।

उसने बताया कि इम्तियाज के पास से उसका फोन नंबर मिलने के बाद नेशनल इनवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआइए) ने पटना धमाके के बारे में उससे पूछताछ की थी। नौशाद ने कहा, इम्तियाज मेरा दोस्त जरूर है, पर मेरा किसी दहशतगर्द तंजीम से कोई ताल्लुक नहीं। इम्तियाज का दोस्त होना मेरे लिए मुसीबत बन गयी। आज दहशतगर्द का दोस्त होने की वजह गांव के लोग उससे बुरी नजर से देखने लगे, जिसे वह बरदाश्त नहीं कर सका और दुनिया को अलविदा कहने की ठानी। इतवार की सुबह आठ बजे वह प्लास्टिक की रस्सी से फंदा बना कर घर की बल्ली से लटक गया। लेकिन, उसकी बड़ी बेटी नसीबा इशरत ने देख लिया और शोर मचाया। पड़ोसियों और घरवालों की मदद से उसे फंदे से उतार कर एचइसी प्लांट अस्पताल, फिर रिम्स में भरती कराया गया।

नौशाद ने बताया कि गांव में उसकी एनएनएनएस नामी इलेक्ट्रिकल दुकान है। वह बिजली के सामान के साथ-साथ मोबाइल और डीटीएच रिचार्ज भी करता है। उसने रांची कॉलेज से 1992 में ग्रेजुएशन और 1996 में रांची यूनिवर्सिटी से उर्दू में पीजी की पढ़ाई की है। उसे कंप्यूटर की भी जानकारी है। उसने बताया कि सीठियो के लोग आज एनआइए या पुलिस की गाड़ी देख कर सहम जाते हैं। नौशाद के मुताबिक इम्तियाज के वजह से सीठियो गांव की शिनाख्त आज दुनिया में दहशतगर्द गांव के तौर में हो गयी है।

नौशाद ने बताया कि अपना, बीवी और बेटी का नाम एन से शुरू होने की वजह उसने दुकान का नाम एनएनएनएस रखा है। बीवी का नाम नूरी, बेटी का नाम नसीबा और बेटे का नाम नाबेद और सबसे छोटी बेटी का नाम नादिरा है। उसके वालिद एचइसी से रिटायर्ड हैं।