बरसों क़बल फ़िल्म मासूम में नीली आँखों वाले लड़के के रूप में जुगल हंसराज ने शाइक़ीन का दिल मोह लिया था लेकिन जब वो बालिग़ हुए तो यश चोपड़ा की मुहब्बतें के सिवाए कोई काबिल ए ज़िक़्र फ़िल्म नहीं है ।
जुगल हंसराज ने अदाकारी छोड़कर हिदायतकारी की तरफ़ तवज्जा दी और कंप्यूटर जनरेटेड इमेजरी (CGI) की बुनियाद पर पहली हिन्दी फ़िल्म रोड साईड रोमियो बनाये। बादअज़ां ( इसके बाद) प्रियंका चोपड़ा को लेकर प्यार इम्पासीबल भी बनाई लेकिन दोनों ही फिल्में बाक्स आफ़िस पर कोई करिश्मा नहीं दिखा सकें।
पी टी आई से बात करते हुए हंसराज ने कहा कि वो अदाकारी से एक अर्सा से अलग हो चुके हैं और कैमरे के पीछे वाली सरगर्मियों में ज़्यादा मसरूफ़ हैं। वो अदाकारी की कमी महसूस करते हैं और ये भी जानते हैं कि मौजूदा दौर में बतौर अदाकार उन के लिए वापसी करना बेहद मुश्किल साबित होगा। लिहाज़ा मैं डावर किशन से महज़ूज़ होता हूँ क्योंकि फ़िल्म साज़ी की ये एक ऐसी सिनफ़ ( वर्ग/ जाती) है जिसके कई पहलू हैं।