शाही इमाम-ए-शाही मस्जिद फ़तह पूरी दिल्ली मुफ़्ती मुहम्मद मुकर्रम अहमद ने शब ए बरा॔त के मौक़ा पर बैन-उल-अक़वामी अमन-ओ-सलामती और मुल्क में तरक़्क़ी-ओ-अमन-ओ-ख़ुशहाली के लिए दुआ की। उन्होंने हज़ारों मुसलमानों के इजतिमा से ख़िताब करते हुए इत्तिबा सुन्नत और इत्तिबा क़ुरआन-ए-करीम पर ज़ोर दिया।
उन्होंने मुसलमानों के लिए सिर्फ़ रसूल ( स०अ०व्०) की शख़्सियत और आप ( स०अ०व्०) की सीरत नीज़ क़ुरआन की रोशनी काफ़ी है अब उन्हें किसी दूसरी तरफ़ देखने की ज़रूरत नहीं है और यही अल्लाह ताला का हुक्म है। उन्हों ने मुहब्बत, इत्तिफ़ाक़-ओ-इत्तिहाद, ख़ुश अख़लाक़ी और फ़िर्कावाराना हम आहंगी पर भी तवज्जा दिलाई।
मुफ़्ती मुकर्रम ने कहा कि हुज़ूर ( स०अ०व्०) का इरशाद मुबारक है कि शब ए बरा॔त में जादूगर, शराबी, मुनज्जम, कीनावर, चुगु़लखोर , माँ बाप के नाफ़रमान, ज़ानी, आपसी रिश्ते तोड़ने वालों और किसी मुस्लमान भाई से तीन दिन से ज़्यादा बोल चाल बंद करने वालों की मग़फ़िरत नहीं है लिहाज़ा उन गुनाहों से हर वक़्त बचते रहना लाज़िम ( जरूरी) है वर्ना कोई इबादत काम नहीं आएगी।
बाबरी मस्जिद के लिए मौलाना ने कहा कि कुलदीप नय्यर और दीगर मुसन्निफ़ीन की कुतुब ( किताब) से पता चलता है कि बाबरी मस्जिद इन्हिदामी ( ध्वस्त/ गिराने की) साज़िश में नरसिम्हा राव शरीक थे। उन्होंने ना सिर्फ मस्जिद को मुनहदिम ( ध्वस्त) कराया बल्कि मोहलत दे कर वहां पर आरिज़ी ( अस्थायी) मंदिर भी बनवाया और पूजा शुरू कराई।
कांग्रेस अगर इस बात से इनकार करती है तो उसे मुसलमानों के सामने हक़ायक़ को लाना चाहीए और मुसलमानों से माफ़ी मांगनी चाहीए और मस्जिद की इसी जगह पर तामीर की राह हमवार करनी चाहीए। मुफ़्ती मुहम्मद मुकर्रम ने कहाकि मुसलमान बाबरी मस्जिद के हक़ से कभी दस्तबरदार नहीं हो सकते।
शाही इमाम ने इसराईली और सीहोनी जारहीयत की शदीद अलफ़ाज़ में मुज़म्मत की और कहा कि रोज़ ही अख़बारात में इसराईली ज़ुल्म-ओ-सितम की नई नई ख़बरें आती हैं जिस से दिल दहल जाता है। इसराईली फ़ौज औरतों और बच्चों तक को नहीं बख़शती इस से बढ़ कर ज़ुल्म और क्या हो सकता है।
उन्होंने फ़लस्तीनी बाशिंदों की तारीफ़ की जो इसराईली ज़ुल्म के ख़िलाफ़ इस्तिक़ामत ( मज्बूती/ दृढता) के साथ खड़े हैं।